जींद। सीटू संबंधित मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स के नाम ज्ञापन सौंपा। इससे पहले वर्कर्स नेहरू पार्क में एकत्रित हुई और वहां जनसभा की। इसकी अध्यक्षता जिला प्रधान संतोष घसो ने की व संचालन जिला सचिव रेखा गतौली ने किया।
यूनियन के राज्य सचिव सत्यवान व जिला कैशियर संदीप जाजवान ने कहा कि लंबे समय से लंबित पड़ी मांगों की सरकार अनदेखी कर रही है। इसके विरोध में पिछले साल 11 नवंबर को करनाल में प्रदर्शन किया गया गया था। मिड डे मील वर्कर्स व सरकार के बीच मांगों को लेकर सहमति बनी थी। लेकिन सरकार कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने की बजाय विभाग को निजीकरण की ओर धकेल रही है। निजीकरण की आड़ में विभाग को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। इस कारण वर्कर्स में भारी निराशा का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की मजदूर व कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण महंगाई व बेरोजगारी बढ़कर चरम पर पहुंच गई है। कोरोना महामारी में भी सरकार अपने चहेते पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए आमादा है। सरकार द्वारा मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में कोई इजाफा नहीं किया जा रहा है। मिड डे मील वर्कर्स की मांग है कि वर्कर्स के बकाया मानदेय में तुरंत बढ़ोतरी की जाए। वर्दी भत्ता दो ड्रेस के लिए एक वर्ष में कम से कम 1200 रुपये मिलने चाहिए। हमारी मांग है कि वर्कर्स को 65 साल की उम्र तक काम करने की अनुमति दी जाए। सभी मिड डे मील वर्कर्स का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण हो। मिड डे मील वर्कर्स के परिवार को प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम अनाज प्रति माह मुफ्त दिया जाए। सभी प्रवासी मजदूरों के बच्चों को भी मिड डे मील योजना के दायरे में लाया जाए। इसके लिए अधिक पोषित सामग्री तैयार कर वितरित की जाए।