जींद। शहर की गलियों और मोहल्लों में बढ़ती कुत्तों और बंदरों की संख्या अब लोगों के लिए परेशानी के साथ-साथ स्वास्थ्य का खतरा भी बन रही है। कुत्तों और बंदरों के काटने की घटनाओं के बाद लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए नागरिक अस्पताल पहुंच रहे हैं।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 30 लोग पशुओं के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। महीने में ऐसे मरीजों की संख्या करीब एक हजार तक पहुंच जाती है।
इनमें प्रतिदिन 20 से 22 मरीज बीपीएल और आयुष्मान कार्ड धारक होते हैं। अन्य मरीजों को 100 रुपये की स्लिप कटवाने के बाद नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग में वैक्सीन लगाई जाती है। निजी अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन की एक डोज पर करीब 450 रुपये तक खर्च हो सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल की सुविधा लोगों के लिए आर्थिक राहत भी बनी हुई है।
शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड और बंदरों की मौजूदगी से लोग परेशान हैं। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा रहता है। कई बार कुत्ते के अचानक पीछे दौड़ने या बंदरों के झुंड के सामने आने से लोग घायल हो जाते हैं।
पशु के काटने के बाद रेबीज की आशंका को देखते हुए समय पर इलाज कराना जरूरी है। रेबीज वायरस से होने वाली गंभीर बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इसके लक्षण सामने आने के बाद बीमारी जानलेवा हो सकती है। बेचैनी, पानी या खाना निगलने में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। इसलिए पशु के काटने को मामूली मानकर इलाज टालना जोखिम भरा हो सकता है।
बंदरों के आतंक पर 38 रिमाइंडर बेअसर
नागरिक अस्पताल परिसर में बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर की ओर से डीसी को अब तक करीब 38 बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं फिर भी समस्या बनी हुई है। शहर की गलियों, चौराहों और कॉलोनियों में कुत्तों के झुंड तथा बंदरों की मौजूदगी से खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ गया है।
अर्बन एस्टेट में दिनभर घूमते रहते हैं कुत्तों व बंदरों के झुंड
अर्बन एस्टेट निवासी जगदीश व मनोज ने बताया कि अर्बन एस्टेट में कुत्तों व बंदरों के दिनभर झुंड घूमते रहते हैं। इनके कारण यहां पर प्रतिदिन पांच से सात लोगों को रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। उनको भी कुत्तों ने काटा है लेकिन प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। प्रशासन को इनको पकड़कर कहीं दूर छोड़ना चाहिए।
वर्जन
कुत्ते, बंदर या किसी अन्य संदिग्ध पशु के काटने पर सबसे पहले घाव को बहते पानी और साबुन से कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। अस्पतालों में वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
- डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
27जेएनडी21: जगदीश।
27जेएनडी21: जगदीश।