रेवाड़ी। जिले में उल्लास योजना के तहत 7 हजार से अधिक अभ्यर्थी 28 सितंबर को साक्षरता परीक्षा देंगे। यह परीक्षा उन लोगों के लिए आयोजित की जा रही है जिन्हें हाल ही में बुनियादी पढ़ना-लिखना सिखाया गया है। शिक्षा विभाग के मुताबिक, यह पहल 2027 तक जिले को 100 प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है।
वर्तमान में जिले की साक्षरता दर 96.94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों का मूल्यांकन सरल भाषा और व्यावहारिक प्रश्नों के माध्यम से किया जाएगा।
2011 की जनगणना में जिले के करीब 67 हजार 413 लोग निरक्षर पाए गए थे। लगातार चलाए गए अभियानों के चलते बीते 14 सालों में इनमें से लगभग 34 हजार लोग साक्षर हो चुके हैं हालांकि अभी भी करीब 33 हजार लोग निरक्षर हैं।
शिक्षा विभाग ने चालू सत्र 2025-26 के लिए 25 हजार 515 लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य तय किया है। लक्ष्य पूरा होने के बाद जिले में केवल कुछ हजार ही निरक्षर बचेंगे जिन्हें अगले एक से दो वर्षों में साक्षर कर दिया जाएगा।
मिशन को सफल बनाने के लिए जिले में 331 स्कूलों में उल्लास सेंटर संचालित किए जा रहे हैं जहां निरक्षरों को पढ़ाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि सतत मॉनिटरिंग के जरिए 2027 तक जिले को पूर्ण साक्षर बनाने का संकल्प पूरा किया जाएगा।
अधिक आयु के लोगों को सशक्त बनाना उद्देश्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार भारत सरकार ने 2022 से पांच साल की अवधि के लिए न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के तहत उल्लास नामक केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की थी। योजना का प्राथमिक उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी लोगों को सशक्त बनाना है जो किसी कारणवश शिक्षित नहीं हो सके। ऐसे लोगों को शिक्षित करने का अवसर दिया जा रहा है
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वर्जन
उल्लास योजना के तहत जिले में 28 सितंबर को 7 हजार निरक्षर लोगों की साक्षरता परीक्षा होगी। शिक्षा विभाग ने 2027 तक जिले को पूरी तरह 100 प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
-मनदीप कुमार, जिला उल्लास कोऑर्डिनेटर, रेवाड़ी।