29 जुलाना 02: जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का फोटो। संवाद
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जुलाना। जुलाना में करोड़ों रुपये की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। आधुनिक भवन और उपकरण होने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को पूरा इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल में रोजाना करीब 500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन कई जरूरी सेवाएं न होने की वजह से उन्हें जींद या रोहतक रेफर करना पड़ता है। सीएचसी में सात डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं जबकि वर्तमान में केवल चार डॉक्टर ही कार्यरत हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक) न होने से एक्स-रे होने के बाद भी मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पताल जाना पड़ता है।
अस्पताल में आधुनिक एक्स-रे मशीन मौजूद है लेकिन उनका पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा। इसी तरह वेंटिलेटर सुविधा भी पूरी तरह से उपयोग में नहीं है। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला द्वारा उपलब्ध कराए गए दो वेंटिलेटर ऑपरेटर की कमी के कारण नागरिक अस्पताल जींद भेज दिए गए। वहीं सामाजिक संस्था सामाजिक सरोकार परिवार द्वारा दिया गया वेंटिलेटर और मॉनीटर भी अब तक इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका है।
मरीज निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर
करीब दो लाख की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण मरीज निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप सक्रिय हैं जो बिना योग्य प्रशिक्षण के इलाज कर मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग मरीजों को स्टेरॉयड देकर उन्हें दवाओं का आदी बना रहे हैं। अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर होने के बावजूद लगभग दस वर्षों से नसबंदी और नलबंदी के ऑपरेशन बंद हैं। छोटी सर्जरी के लिए भी मरीजों को जींद रेफर किया जाता है।
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सीएचसी में सात डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं लेकिन चार ही तैनात हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद खाली होने के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
-डॉ. संजीव शर्मा , एसएमओ