लोगों की परेशानियां कर्मचारियों और अधिकारियों की मनमानी के कारण कम नहीं हो रही हैं। ऐसा ही मामला रोहतक रोड स्थित जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय का सामने आया है। यहां के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लोगों को परेशान करने की शिकायत इस बार आम लोगों ने नहीं, स्वयं सरकार की गठित निगरानी कमेटी ने की है। अब निगरानी कमेटी के लोगों ने मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के समक्ष उठाने का फैसला लिया है।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक ऑफिस की दो शाखाएं हैं।
मुख्य कार्यालय लघु सचिवालय की दूसरी मंजिल पर है। राशन कार्ड से संबंधित तमाम कार्य रोहतक रोड स्थित कार्यालय में किए जाते हैं। रोहतक रोड स्थित कार्यालय पिछले कुछ दिनों से यहां के कर्मचारियों के व्यवहार के कारण चर्चाओं में है। यहां इसी महीने में लोग दो बार सड़क जाम कर चुके हैं। इसके बावजूद अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण कर्मचारी अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। वहीं यहां काम के लिए आने वाले लोगों को धक्के खाने पड़ रहे हैं। इन समस्याओं से परेशान होकर कुछ लोगों ने भाजपा की निगरानी कमेटी के सदस्यों को फोन कर सूचना दी तो निगरानी कमेटी के लोग यहां पहुंचे।
त्रस्त है जनता, कर्मचारी बेपरवाह
निगरानी कमेटी के सदस्य दिनेश ब्यास, राजेश सैनी और अपर्णा बंसल के अनुसार यहां व्यवस्था बेहद दयनीय हैं। इन्होंने बताया कि शिकायत पर जब वे यहां पहुंचते तो लोग धूप में परेशान खड़े थे और कर्मचारी कार्यालयों में बैठ कर बीड़ी फूंक रहे थे। इनके अनुसार कर्मचारियों का लोगों से बात करने का तरीका भी सही नहीं था।
नहीं बन रहा राशन कार्ड
यहां पहुंची एक महिला ने बताया कि वह उसने अपने सामूहिक परिवार के राशनकार्ड से नाम कटवा कर अलग राशन कार्ड की प्रक्रिया शुरू की है। वह करीब दो महीने से चक्कर काट रही है, लेकिन कर्मचारी कोई रास्ता नहीं बता रहे हैं।
सर्वर डाउन बताकर वापस भेज देते हैं
जुलाना से पहुंची रोशनी देवी के अनुसार उसके राशन कार्ड में परिवार के सभी लोगों के नाम नहीं चढ़ेे हैं। ऑनलाइन रिकार्ड में गड़बड़ी के कारण राशन मिलने में दिक्कत आ रही है। इस गलती को ठीक करवाने के लिए चार-पांच चक्कर काट चुकी है, लेकिन हर बार सर्वर डाउन बताकर वापस भेज दिया जाता है।
अधिकारियों से करेंगे बात
निगरानी कमेटी के एक सदस्य के पास यहां की शिकायत आई थी। इसको लेकर अधिकारियों से बात की जाएगी। यहां व्यवस्था बहुत ही खराब है। जरूरत पड़ी तो यह मामला मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया जाएगा। यदि व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो इस कार्यालय को लघु सचिवालय में शिफ्ट करने की सिफारिश की जाएगी। -संदीप गोसांई, अध्यक्ष निगरानी कमेटी, जींद।
लोगों की समस्या को देखते हुए यहां एक इंस्पेक्टर की तैनाती की गई है, लेकिन एक नाम को बदलने में 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। इससे लोग हंगामा करते हैं। फिर भी व्यवस्था में कोई दिक्कत है, तो इसे ठीक करवाया जाएगा। दफ्तर में बीड़ी पीने का मामला है, तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -राकेश कुमार आर्य, डीएफएससी।