जुलाना से विधायक और वरिष्ठ इनेलो नेता परमेंद्र सिंह ढुल ने कहा कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा जींद और जुलाना की जनता को गुमराह कर रहे हैं। ढुल ने कहा कि पूर्व सीएम ने जुलाना विधानसभा में आयोजित जनसभा में फिर मौका दिया जाने पर हलके की कायाकल्प करने की बात कही है। वहीं अपने शासन काल में हुड्डा ने जुलाना तो क्या पूरे जींद जिला के साथ सौतेला व्यवहार किया है।
ढुल ने कहा कि यदि हुड्डा 10 साल के अपने शासनकाल में कुछ नहीं करवा सके तो अब उनसे जनता को क्या उम्मीद है।
ढुल ने कहा कि भाजपा ने सत्ता संभालते ही फरवरी 2015 में श्वेत पत्र जारी करके यह बताया था कि जींद जिले के साथ पूर्ववर्ती सरकार ने सौतेला व्यवहार किया है। जुलाना के 50 गांवों में आज भी पीने के पानी की किल्लत है। ढुल ने कहा कि अब जुलाना और जींद के लोग हुड्डा की बातों में आने वाले नहीं हैं। ढुल ने कहा कि जींद के शहीद कैप्टन पवन खटकड़ के नाम पर गांव की पंचायत द्वारा जमीन देने के बावजूद कोई संस्थान नहीं बनाया जबकि भाजपा ने बड़े-बड़े वायदे किए थे। ग्राम पंचायत को चारों तरफ से निराशा ही हाथ लगी है। उन्होंने मांग की कि शहीद के नाम से गांव बधाना में कोई बड़ा प्रोजेक्ट लगाया जाना चाहिए। इस मौके पर पूर्व विधायक सूरजभान काजल, कुलदीप पिंडारा, सुदेश चोपड़ा, भूपेंद्र जुलानी, कैप्टन रणधीर चहल, डॉ. दलबीर बीबीपुर, सोनू गुलिया व गुरदीप सांगवान भी मौजूद थे।
रैली में नहीं बरसे बादल, ढुल ने दिया जवाब
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करनाल रैली में नहीं आने के सवाल पर विधायक परमेंद्र सिंह ढुल ने कहा कि इनेलो ने हरियाणा के हितों को सदैव सर्वोपरि रखा है। एसवाईएल के मुद्दे को लेकर प्रकाश सिंह बादल तथा इनेलो को संबंध ठीक नहीं रहे। हो सकता है इस कारण से वे रैली में नहीं आए हों। बाकी इसका सही जवाब तो विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता अभय चौटाला ही दे सकते हैं।
करनाल रैली ने दिखाया आइना
जिलाध्यक्ष कलीराम पटवारी ने कहा कि करनाल रैली में उमड़ी भीड़ ने भाजपा और कांग्रेस को आइना दिखाया है। उन्होंने कहा कि दोनों ही दल कुर्सियों पर रैली करती है। यदि इनेलो भी कुर्सियों पर रैली करती तो सारे हरियाणा में भर में कुर्सियां ही कम पड़ जाती। सिरसा नगर परिषद में भाजपा समर्थक की जीत के सवाल पर पटवारी ने कहा कि यह भाजपा की साजिश है। उनके कार्यकर्ता रैली में व्यस्त थे और इसको ध्यान में रखते हुए ही 25 सितंबर को सिरसा का चुनाव तय किया गया।