हरियाणा के जींद में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि 4 दिसंबर को विशेष दिवस मनाया जाएगा, ताकि लोग इस विशेष दिन को संत शिरोमणि सैन महाराज के नाम से याद रखे। मुख्यमंत्री मनोहरलाल सोमवार को एकलव्य स्टेडियम में संत शिरोमणि सैन महाराज की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि दालमवाला अस्पताल से लेकर डॉ. राज सैनी अस्पताल तक जाने वाले मार्ग का नाम संत शिरोमणि सैन महाराज के नाम से रखा जाएगा। उन्होंने जींद में 590 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा भी की। इनमें से 31 परियोजनाओं का शिलान्यास पत्थर रखा, जबकि आठ परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
जींद के लोगाें को भाखड़ा नहर के पानी को पेयजल के रूप में मुहैया करवाने की 388 करोड़ रुपये की परियोजना का भी शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए नरवाना के पास से गुजर रही भाखड़ा नहर से पाइपलाइन दबाकर गांव बड़ौदी में बड़ा जलघर लगाया जाएगा। इसके लिए 46 एकड़ जमीन खरीद ली है। अब इसका काम शुरू होगा। छह सड़कों के निर्माण पर 31 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नगर परिषद भवन का उद्घाटन किया।
लघु सचिवालय के सामने गोहाना रोड पर संत शिरोमणि सैन भगत के नाम से चौक बनाया जाएगा। यहां पर संत सैन भगत की प्रतिमा भी लगाई जाएगी। यदि बीच में जगह होगी तो बीच में नहीं तो साइड में सैन भगत की प्रतिमा लगाई जाएगी। जींद में बन रहे धन्ना भगत मेडिकल कॉलेज में भी एक बिल्डिंग का नाम संत सैन भगत के नाम पर रखा जाएगा।
भिवानी व करनाल में भी एक सड़क का नामकरण भी संत शिरोमणि सैन भगत के नाम से रखा जाएगा। जींद में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की तरफ से सैन भगत धर्मशाला बनाने के लिए प्लाॅट दिया जाएगा। इस धर्मशाला के निर्माण के लिए 21 लाख रुपये वह खुद और 11 लाख रुपये सांसद कोटे से दिलाएंगे। इस मौके पर डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा, भाजपा के जिला प्रधान राजू मोर, विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा, पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व विधायक प्रेमलता व प्रवक्ता कर्मवीर सैनी समेत सैन समाज के काफी लोग मौजूद रहे।
अब बेटियों को मारने के लिए नहीं, बचाने के लिए जाना जा रहा हरियाणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले हरियाणा को बेटियाें को मारने वाले प्रदेश के रूप में जाना जाता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत हरियाणा से की। अब प्रदेश को बेटियों को बचाने वाले प्रदेश के रूप में जाना जाता है। प्रदेश में अब एक हजार लड़कों पर 933 बेटियों ने जन्म लिया है। पहले यह संख्या 871 थी।