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शहर की सड़कों हटेंगे लावारिस सांड़

Sun, 26 Mar 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
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शहर की सड़कों पर खड़े लावारिश सांड। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पिछले करीब एक दशक से शहर के लोगों के लिए परेशानी का सबब बने बेसहारा नंदियों से अब निजात मिलने की उम्मीद जागी है। जिला प्रशासन ने लोगों के सहयोग से बीड़ बड़ावन के पास नंदीशाला का निर्माण शुरू किया है। सांसद रमेश कौशिक ने शनिवार को नंदीशाला का शिलान्यास किया। अगले करीब दो महीने में नंदीशाला की चारदीवारी पूरी होने की उम्मीद है और इसके साथ शहर के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि अब तक सांडों और गायों की चपेट में आकर करीब आधा दर्ज लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
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जींद के विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा भी सांडों की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं।
नंदीशाला के लिए श्री गोशाला ने चार एकड़ जमीन दी है। शहर में करीब दो से तीन हजार सांड घूमते हैं, जो आए दिन हादसों के कारक बनते हैं। एक ओर सांड सीधे टक्कर मार कर लोगों को घायल करते हैं तो इनकी आपसी भिड़ंत से भी लोग घायल हो रहे हैं। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान सांसद रमेश कौशिक ने कहा कि आज शहर की एक ज्वलंत समस्या का समाधान लोगों ने नंदीशाला के माध्यम से निकाल लिया है। सांसद ने नंदीशाला के निर्माण के लिए अपने स्वेच्छिक कोटे से 11 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। सांसद ने यह भी कहा कि नंदीशाला में एक लाख रुपये या इससे अधिक की राशि देने वाले लोगों को वे सम्मानित भी करेंगे।

लोगों के चंदे से होगी चारे की व्यवस्था
डीसी विनय सिंह के अनुसार नंदीशाला का खर्च चलाने के लिए लोगों की मदद ली जा रही है। इसके लिए पहले ही लोग काफी चंदा दे चुके हैं और शिलान्यास के दौरान रोडवेज कर्मचारियों ने एक लाख रुपये देने की घोषणा की। वहीं अलेवा गांव निवासी मास्टर सूरजभान ने पेंशन फंड से 5,100 रुपये देने की घोषणा की। इसके अलावा भी कई लोगों और संस्थाओं ने नंदीशाला के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। भाजपा के प्रदेश सचिव जवाहर सैनी ने एक लाख रुपये देने की घोषणा की।
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दो बच्चियों ने तोड़े गुल्लक, दान की राशि
कार्यक्रम के दौरान दो छोटी बच्चियों रोहतक रोड निवासी वंशिका और हिमानी ने अपने गुल्लक तोड़ कर इससे निकली राशि को नंदीशाला के लिए दान दिया। लोगों ने इनके प्रयास की सराहना की।

तीन साल से चल रहे प्रयास चढ़े सिरे
नंदीशाला के लिए हालांकि की लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं, लेकिन पिछले तीन साल से प्रशासन के लिए योजना बना रहा था, लेकिन सिरे नहीं चढ़ रही थी। अब नंदीशाला बनने से लोगों को राहत मिलेगी।

मुशकिल भरी राह
हालांकि प्रशासन ने नंदीशाला का निर्माण शुरू कर दिया है, लेकिन प्रशासन की यह राह मुश्किल भरी है। अब प्रशासन को डर सता रहा है कि कहीं आसपास के क्षेत्रों और गांवों से लोग यहां नंदियों को न छोड़ दें। इसके लिए भी खास निगरानी रखी जा रही है। वहीं डीसी विनय सिंह ने कहा कि जिला में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए ऐसी ही नंदीशालाओं को निर्माण किया जाएगा।
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