अध्यापकों से केवल अध्यापन कार्य लिया जाए और सरकारी स्कूलों में पांचवीं व आठवीं कक्षा में दोबारा बोर्ड लागू होना चाहिए। इसके अलावा पूरे देश में एक जैसा पाठ्यक्रम लागू होना चाहिए।
इस तरह के कई सुझाव ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग को दिए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अगर इन बातों पर शिक्षा विभाग अमल करे, तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधर सकती है। शिक्षा विभाग द्वारा ग्रामीणों से नई शिक्षा नीति निर्माण को लेकर सुझाव मांगे गए। इसी के तहत रविवार को ग्रामीण क्षेत्र के सभी सरकारी स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करके ग्रामीणों को सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया गया।
जिलेभर में ग्रामीणों द्वारा जो सुझाव दिए गए, उनमें मुख्य बातें निकलकर आई कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर तभी सुधर सकता है, जब वहां मूलभूत सुविधाओं और गुणात्मक शिक्षा पर जोर दिया जाए।
साथ ही ग्रामीणों का एकमत यह भी है कि अध्यापक शैक्षणिक कार्यों के अलावा अन्य विभागीय कार्यों में उलझे रहते हैं। अध्यापकों से केवल शैक्षणिक कार्य ही लिया जाए। ग्रामीणों को इस बात की भी टीस है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने की भी ढंग की व्यवस्था नहीं है।
यह किसी से नहीं छुपी है कि सरकारी स्कूलों में रखे एजुसेट व कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। कई स्कूलों में जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं हैं, तो कई स्कूलों में बच्चे नहीं होने से अध्यापक खाली बैठे हैं।
ग्रामीण चाहते हैं कि सरकारी स्कूलों के बिगड़े ढांचे को बदलने के लिए रिक्त पदों पर अध्यापकों की भर्ती की जाए और जरूरत अनुसार स्कूलों को अपग्रेड करके पुरानी शिक्षा प्रणाली को ही लागू किया जाए।
ग्रामीणों ने सुधार के लिए ये दिए सुझाव
1. आठवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को इच्छानुसार विषय चुनने की आजादी हो।
2. विषय का पूर्ण ज्ञान आवश्यक है, इसके लिए अध्यापक प्रशिक्षण को प्रभावी व सशक्त बनाया जाए।
3. सभी सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तरह एनसीआर, एलकेजी व यूकेजी कक्षाएं प्रारंभ की जाएं, ताकि शुरू से ही बच्चे का आधार मजबूत हो सके।
4. मौलिक शिक्षा पूरी होने के बाद व्यावसायिक पाठ्यक्रम लागू होना चाहिए।
5. भर्ती के समय अंकों के स्थान पर अनुभव को महत्व दिया जाए।
6. प्राइवेट प्रकाशन पर रोक लगनी चाहिए।।
8. एससीईआरटी को सशक्त होना चाहिए। एकेडमिक डिविजन प्रभावशाली हो और नियमित मॉनिटरिंग तथा अभिभावकों व अध्यापकों की बच्चों की प्रोग्रेस रिपोर्ट को लेकर साप्ताहिक बैठक होनी चाहिए।
9. व्याकरण पर जोर दिया जाए।
10. अंग्रेजी विषय का स्तर विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर अनुसार किया जाए।
11. हेल्प बुक पूर्णत: प्रतिबंधित होनी चाहिए।
12. पाठ्यक्रम एक स्तर का किया जाए।
13. भौतिक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं, जैसे फर्नीचर, जनरेटर, बिजली, कंप्यूटर लैब।
14. हर दो वर्ष बाद अध्यापकों की नियमित भर्ती निकाली जाए।
15. समयबद्ध पदोन्नति हो, स्तरोन्नत करते समय परीक्षा का प्रावधान हो।
16. पांचवीं व आठवीं में बोर्ड लागू हो।
17. परीक्षाएं त्रैमासिक हों, मासिक नहीं।
18. पूरे देश में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम हो। प्राइवेट प्रकाशकों पर सख्ती हो। पुस्तकों का मूल्य निर्धारण भारत सरकार करे।
संघ ने बताया रैली को असफल करने के लिए शिक्षा विभाग का ड्रामा
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा नीति बनाने को लेकर ग्रामीणों से सुझाव मांगने को ड्रामा करार दिया है। संघ के प्रेस प्रवक्ता भूपसिंह वर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल संघ की रैली को असफल करने की मंशा से रखा गया था। विभाग को ग्रामीणों के सुझाव से कुछ लेना-देना नहीं है। उन्होंने पहले ही तय किया हुआ है कि क्या शिक्षा नीति लागू करनी है। जब गांवों में पंचायतें ही भंग हो गई हैं, तो सुझाव देने का तो सवाल ही नहीं उठता।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर की चर्चा
नरवाना। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेलरखा में रविवार को केंद्र सरकार के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा करने के लिए बैठक की गई। इसमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के टीचर, एसएमसी के प्रधान और सदस्यों ने भाग लिया। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेलरखा के प्रिंसिपल रघु भूषणलाल गुप्ता ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी किए कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। प्रिंसिपल गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि अध्यापकों को शिक्षण कार्य के अलावा कोई और काम न दिया जाए।
अध्यापकों व पंचायत के सदस्यों ने लिया भाग
पिल्लूखेड़ा। खंड के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पिल्लूखेड़ा में रविवार को बैठक हुई, जिसमें पिल्लूखेड़ा के तीनों सरकारी स्कूलों के अध्यापकों व पंचायत के सदस्यों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पिल्लूखेड़ा के प्रार्चाया सतनारायण खत्री ने की। बैठक में सरकार द्वारा जारी नई शिक्षा नीति पर सुझाव के बारे में चर्चा की गई।
सभी स्कूलों में ग्रामीणों व पंचायत को बुलाकर उनके सुझाव मांगे गए। इन सुझावों के आधार पर संबंधित गांव में क्या मांगें व जरूरतें हैं, वहां के बच्चों का किस खेल के प्रति रुझान है। इसी आधार पर शिक्षा नीति का निर्धारण कर विभाग वहां पर सुविधाएं मुहैया करवाएगा। -सतबीर सरोहा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।