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इंसान जाल के अंदर, बंदर बाहर

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घरों के ऊपर और बाहर बंदरों से बचने के लिए लगाए गए लोहे के जाल। - फोटो : Jind
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शहर में शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला या कॉलोनी होगी जिसमें अधिकांश मकान मालिकों ने घरों के आगे या छतों पर बंदरों से बचने के लिए लोहे की जाली न लगवाई हो। जाल लगवाने पर एक मकान मालिक को 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में 500 से अधिक मकानों पर जाल लगे हुए हैं। अब ऐसा हो गया है कि लोग तो जाल के अंदर है, जबकि बंदर बाहर। बार-बार नपा प्रशासन से बंदरों को पकड़वाने की मांग करके लोग थक चुके हैं, लेकिन बंदरों को नपा प्रशासन नहीं पकड़वा रहा है। शायद ही कोई ऐसा दिन जाता हो जिस दिन शहर में बंदर बच्चे, बुजुर्ग, महिला व पुरुष को नहीं काटते हो। बंदरों के नपा प्रशासन के नहीं पकड़वाने पर लोगों ने बंदर जाल मकानों के आगे लगाने शुरू कर दिए हैं।
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बंदरों के काटने के चलते हर रोजग चार से पांच मरीज सरकारी अस्पताल एंटी रेबिज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। गली व मोहल्लों में जाल लगने के बाद बंदर छतों व गलियों में दीवारों पर झूंड बना कर बैठ रहते हैं। गलियों में महिलाओं का बैठना व बच्चों का खेलना तक बंद हो गया है। लोगों ने मांग की है कि बंदरों को नपा प्रशासन पड़वाए ताकि लोगों को जाल लगवाने व बंदरों के आतंक से छुटकारा मिले। तरसेम, सुरेश, मनीष व राजकुमार ने कहा कि बंदरों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। बंदरों के आतंक के चलते घरों पर जाल लगवाने पड़ रहे हैं। एक जाल पर कम से कम 20 हजार रुपये की राशि खर्च हो रही है। बच्चे गलियों में बंदरों के डर से नहीं खेल सकते। सुबह मंदिर में जाने वाले श्रद्धालुओं को बंदर काट रहे हैं। गलियों में राह चलते लोगों के पीछे बंदर पड़ जाते हैं और हाथ से सामान को छिन ले जाते हैं। नपा प्रशासन को चाहिए कि बंदरों को पकड़वाएं। एसडीएम डॉ. राजेश कोथ ने कहा कि बंदरों को जल्द पकड़वाया जाएगा। नगर पालिका इसको लेकर टेंडर लगाएगी।
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