04जेएनडी22-बीबीपुर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद किसान और प्रभारी डॉ. नीरज पवार। स्रोत अधिकार
जींद। विकसित भारत रोजगार और आजीविका गांरटी अधिनियम के तहत रविवार को जुलानी और बीबीपुर में जागरूकता अभियान तथा किसान गोष्ठी आयोजित की गई। यह कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विज्ञान केंद्र पांडु-पिंडारा की तरफ से आयोजित किया गया था।
वरिष्ठ संयोजक डॉ. नीरज पवार ने बताया कि यह एक नया ग्रामीण रोजगार विधेयक है जो ग्रामीण विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने, जल संरक्षण, डिजिटल गर्वनेंस पर बल देना, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और जलवायु अनुकूलता पर जोर देने पर ध्यान केंद्रित है। इसके तहत 125 दिन के रोजगार की गारंटी का प्रावधान है।
इसे विकसित भारत 2047 से जोड़ा गया है, जिसके तहत राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण विकास का ढांचा स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि यह विधेयक ग्रामीण रोजगार नीति को अधिकार-आधारित सामाजिक सुरक्षा ढांचे से हटाकर एक मिशन आधारित, संरचना केंद्रित मॉडल की और ले जाता है।
इस विधेयक के द्वारा रोजगार दिवसों की वृद्धि और विकासोन्मुख दृष्टिकोण जैसे सकारात्मक पहलू हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी। डॉ. पवन ने बताया कि राष्ट्रीय विकास के साथ ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में भी बदलाव की आवश्यकता है।
विशेषज्ञ डॉ. धीरज पंधाल ने अहिरका में भी कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को इस मिशन के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने बताया कि कृषि के चरम कार्य समय जैसे बुआई और कटाई के दौरान रोजगार गारंटी योजना को स्थगित करने का प्रावधान है, जिससे कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त श्रम बल प्राप्त हो सकेगा।
डॉ. रवि और डॉ. प्रीति ने बताया कि इसका उद्देश्य रोजगार पैदा करने के साथ-साथ गांव में मजबूत व टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना है।