जींद। भारतीय रेलवे शुक्रवार को तकनीक के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। 16 अप्रैल 1853 को देश में भाप के इंजन से शुरू हुआ रेल सफर अब अत्याधुनिक हाइड्रोजन तकनीक तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (नमो ग्रीन रेल) को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके साथ ही भारत दुनिया का छठा ऐसा देश बन जाएगा जहां हाइड्रोजन ईंधन से ट्रेन का संचालन होगा।
वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेलवे लगातार स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों पर काम कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी रणनीति का अहम हिस्सा है। डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों पर निर्भरता खत्म होगी। प्रदूषण नहीं होगा। शोर भी न के बराबर होगा।
जींद से शुरू होने वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन करीब 89 किलोमीटर का सफर तय कर सोनीपत तक जाएगी। इसके संचालन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इससे पहले जर्मनी, चीन, जापान, फ्रांस और स्वीडन में हाइड्रोजन ट्रेन संचालित हो रही हैं।
सबसे लंबी व शक्तिशाली ट्रेन भारत में
2018 में जर्मनी में दुनिया में पहली बार कोराडिया आईलिंट हाइड्रोजन ट्रेन कमर्शियल सर्विस में आई थी। इसमें 150 लोगों के बैठने के लिए सीट है। जबकि इतने ही यात्री खड़े भी हो सकते हैं। अधिकतम गति सीमा 140 किमी प्रति घंटा तक है। हाइड्रोजन ट्रेन का सबसे बड़ा नेटवर्क भी जर्मनी के पास ही है। वहीं, भारत की हाइड्रोजन ट्रेन सबसे लंबी और शक्तिशाली होगी। इसकी क्षमता 2400 किलोवॉट है। इसमें 1200 किलोवाट की 2 ड्राइविंग पावर कार (इंजन) होंगे। एक आगे और दूसरा पीछे लगा होगा। साथ ही 8 पैसेंजर कार (यात्री कोच) भी हैं। तकरीबन 2600 यात्री एक बार में यात्रा कर सकेंगे। अधिकतम गति सीमा 110 किमी प्रति घंटा तक होगी।
दुनिया का अगला इंधन होगा हाइड्रोजन
आने वाले सालों में हाइड्रोजन भविष्य के इंधन के रूप में देखा जा रहा है। कनाडा, इटली, सऊदी अरब, ऑस्ट्रिया, स्पेन, नीदरलैंड्स, पोलैंड, में भी हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल हो चुके हैं। एक तकनीकी बेवसाइट के अनुसार यूरोप के 41 देशों में हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने को लेकर तैयारी चल रही है। डीजल और बिजली पर निर्भरता कम होगी। भारत में भी इसका विस्तार देखने को मिलेगा।
भारतीय रेलवे को मिलेगा नया विस्तार
हाइड्रोजन ट्रेन की परिचालन लागत यानी ऑपरेटिंग कॉस्ट डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेन की अपेक्षा काफी कम होगी। साथ ही ट्रैक का विद्युतीकरण करने का खर्च बचेगा। भविष्य में रेलवे इस बचत को नए ट्रैक बिछाने में खर्च कर सकता है। ऐसे में उन परियोजनाओं को नया विस्तार मिल सकता है, जो बजट के अभाव में लंबे समय से अटकी है।
हाइड्रोजन ट्रेन: एक नजर में
हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में करीब 2800 करोड़ रुपये तक का प्रावधान किया गया था।
हेरिटेज और पहाड़ी रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए 600 करोड़ रुपये अलग से आवंटित किए गए थे।
हाइड्रोजन ट्रेन के ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए 111.83 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई थी।
वर्ष 2023 में रेल मंत्रालय ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ परियोजना की घोषणा की थी।
जींद में करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से हाइड्रोजन गैस प्लांट तैयार किया गया है।
एक किलोग्राम हाइड्रोजन से लगभग उतनी ऊर्जा प्राप्त होती है, जितनी करीब 4.5 लीटर डीजल से मिलती है।
दुनिया में पहली बार 2018 में जर्मनी में हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री ट्रेन का संचालन शुरू हुआ था। इसके बाद 2023 में चीन ने भी हाइड्रोजन आधारित यात्री ट्रेन का संचालन शुरू किया।