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आज के समय में इंसान को समझाना सबसे ज्यादा मुश्किल : समणी जयंत प्रज्ञा

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04जेएनडी17-पुरानी अनाज मंडी में स्थित तेरापंथ भवन में प्रवचन सुनते हुए श्रद्धालु। संवाद
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उचाना। पुरानी अनाज मंडी में स्थित तेरापंथ भवन में आचार्य महाश्रमण की शिष्या समणी जयंत प्रज्ञा, सन्मति प्रज्ञा के सान्निध्य धर्म सभा आयोजित हुई। उन्होंने कहा कि आज के समय में इंसान को समझना सबसे ज्यादा मुश्किल है। मुक्ति में जाने का तीसरा उपाय सरलता है।
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साधक के जीवन में सरलता अति आवश्यक है। सरलता में ही धर्म ठहरता है। आज अगर इंसान छल, कपट, फरेब को छोड़ दें तो वह अतिशीघ्र मुक्ति में चला जाएगा। आज इंसान कहता कुछ है, करता कुछ है और हकीकत में कुछ और ही होता है।
आपके मन में भी ये ख्याल आता होगा जो मैं धर्म ध्यान कर रहा हूं, पूजा पाठ कर रहा हूं, वो सफल और सार्थक हो रहा है या नहीं। इसका सीधा सा उपाय है अगर हमारे क्रोध, मान, माया, लोभ कम होगा व सरलता जीवन में आ रही है तो समझ लेना हमारा पूजा पाठ सफल हो गया है।
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उन्होंने कहा कि प्रार्थना थोड़ी ही देर सही मगर पूरे मन से करो। प्रार्थना में यदि तुम्हारे मन न जुड़े तो प्रार्थना अधूरी है। मगर इसका यह मतलब कतई नहीं कि तुम माला फेरना बंद कर दो। माला 107 मनकों पर भले ही मन न टिका हो। आखिरी मनके पर भी पल भर के लिए मन टिक गया तो समझो प्रार्थना सार्थक हो गई। जीवन में हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि दुखी मन से हमारे अंदर निराश सोच उत्पन्न होती है। खुश रहने से हमारे अंदर सकारात्मक सोच पैदा होती है।
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