जींद। आचार्य पवन शर्मा ने शनिवार की रात माता वैष्णवी धाम में आयोजित नवार्ण महायज्ञ के छठे दिन श्रद्धालुओं के समक्ष प्रवचन में कहा कि मां को अबोध शिशु बनकर पुकारो तो मां को आना ही होगा। उन्हें हमें अपने आंचल में छिपाना ही होगा। आचार्य ने कहा कि बच्चा यदि खिलौनों में लगा रहे तो मां निश्चिंत होकर अपना घर का काम समेटती रहती है।
वहीं बच्चा यदि उन खिलौनों को पटककर एकमात्र मां के लिए व्याकुल होकर रोने लगे तब मां भी अपना सब काम छोड़ दौड़ी चली आती है और उसके आंसू पोंछकर उसे तुरंत अपने आंचल में छिपा लेती है।
बच्चा जब खिलौनों से खेल भी रहा हो और झूठ-मूठ का रोने का नाटक भी कर रहा हो तब मां उसे गोद में नहीं लेती। ठीक यही बात जगत जननी मां भवानी की भी है। वह हमारी आंतरिक भावना को देखती हैं हमारी क्रिया को नहीं।
इस दौरान घनश्याम सिंघल, विरेंद्र लाठर, डॉ. संजय शर्मा, सुशील गुप्ता, सचिन गोयल, सुरेश कोचर, जतिन नागपाल, अरमान लाठर, आयुष्मान व अंशुमान ने सहपरिवार महायज्ञ में आहुति अर्पित की।