जींद। करीब दो महीने पहले छात्तर गांव में हुए झगड़ने ने अब पूरी तरह से जातीय रंग ले लिया है। अनुसूचित जाति के लोग सामाजिक बहिष्कार के चलते घबराए हुए हैं। उनका कहना है कि उन्हें खेतों से चारा तक नहीं लाने दिया जा रहा। इसके चलते एक-एक लाख रुपये की भैंस उन्हें 25-30 हजार रुपये में बेचनी पड़ी हैं।
हालांकि गांव में गैर अनुसूचित जाति के लोगों ने भी माना है कि पिछले महीने में सामाजिक बहिष्कार का फैसला हुआ है। इसके चलते गांव में तीन दिन तक दुकानों से भी सामान नहीं मिला, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। गांव में भाईचारा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह दो पक्षों में झगड़ा था, ऐसे में कुछ लोगों ने जान-बूझकर इसे जातीय रंग दिया है। वहीं, मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस ने गांव में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है।
छात्तर गांव में यह विवाद एक अगस्त को शुरू हुआ। तब रात के समय अनुसूचित जाति की बस्ती में कुछ युवाओं द्वारा शराब के नशे में उत्पात मचाया गया। यह मामला भी इतना नहीं उलझा, लेकिन 11 सितंबर को फिर से हुए झगड़े ने विवाद को बढ़ा दिया। छात्तर गांव निवासी विशाल ने बताया कि एक अगस्त की रात को गांव के ही कुछ लोग शराब पीकर अनुसूचित जाति की बस्ती में आए। उन्होंने गालियां देनी शुरू कर दी और विरोध करने पर उनके साथ झगड़ा किया। इस दौरान सचिन व गुरमीत पर ईंटों से हमला भी किया। आरोप है कि सात सितंबर को गांव के कुछ लोगों ने जबरन केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया। इसके बाद इसी कड़ी में दूसरा विवाद 11 सितंबर को हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाला गुरमीत 11 सितंबर को घोघड़ियां गांव में खेल देखने गया हुआ था। वहां पर मौजूद छात्तर गांव निवासी एक व्यक्ति ने गुरमीत को जातिसूचक गालियां दीं और मारपीट की। इस पर उचाना थाने में 13 सितंबर को केस दर्ज करवाया गया। इसके बाद गांव में एक जाति विशेष के लोगों ने दोनों केस वापस लेने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया और कुछ दिन पहले गांव में पंचायत कर अनुसूचित जाति के लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का एलान किया गया।
राशन, दूध, दवा के लिए जा रहे आठ किलोमीटर
अनुसूचित जाति के रवि, विशाल, पवन, रोहताश व महिपाल ने बताया कि गांव में उन्हें कोई भी सामान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते मांडी व घोघड़ियां गांव से सामान लाना पड़ रहा है। ऐसे में जरूरत के लिए दूध इकट्ठा ही लाया जा रहा है। दूसरे गांव में भी पता चलने पर वहां से भी दूध नहीं मिल रहा।
तीन दिन रही दिक्कत
सवर्ण समुदाय के एक व्यक्ति ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि यह सही है कि 26 सितंबर को हुई पंचायत के बाद तीन दिन तक दिक्कत हुई। लेकिन इसके बाद प्रशासन गांव में आया और सब कुछ सामान्य करवा दिया है। वहीं एक दुकानदार ने बताया कि वे सामान देने का तैयार हैं, लेकिन अनुसूचित जाति के एक मोहल्ले के लोग सामान लेने ही नहीं आते।
दूसरे मोहल्ले को बनाया जा रहा है ढाल
वहीं अनुसूचित जाति के एक मोहल्ले के लोगों का कहना है कि जब भी अधिकारी आते हैं तो दूसरे मोहल्ले के लोगों को प्रभावशाली लोग आगे कर देते हैं, जबकि बहिष्कार उनके मोहल्ले के लोगों का हुआ है। ऐसे में दूसरे मोहल्ले के लोगों ढाल बनाया जा रहा है।
उचाना के डीएसपी जितेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और पुलिस तैनात है। इस प्रकरण में तीन शिकायतें आई हैं। एक मामले में आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, दूसरे में समझौता हो गया और तीसरे में 23 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हो गया है। पुलिस अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रही है। किसी के साथ भी गलत नहीं होने दिया जाएगा।
भीम आर्मी की कोर कमेटी के सदस्य संदीप बराह कला ने कहा कि यह केवल छात्तर गांव का मामला नहीं है। उचाना क्षेत्र में और पूरे देश में अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। छात्तर से पहले खापड़ गांव में भी सामाजिक बहिष्कार का मामला आ चुका है। ऐसे में 16 अक्तूबर को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन होगा। इसमें खपड़ व छात्तर गांव के पीड़ित लोग हिस्सा लेंगे। इसके अलावा भीम आर्मी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनजी सिंह नोटियाल, प्रदेशाध्यक्ष कमल कुमार बराड़ा भी पहुंचेंगे।