रेवाड़ी। रामगढ़ भगवानपुर अस्पताल बनाओ संघर्ष कमेटी ने एक बार फिर 200 बेड के अस्पताल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रविवार को नाई वाली चौक के पास प्रेसवार्ता कर आगामी रणनीति की जानकारी दी है।
कमेटी ने कहा है कि जब एनएच-71 के साथ लगती भगवानपुर की जमीन पर सिविल अस्पताल का प्रस्ताव अंतिम चरण में था तो अचानक उस फाइल को होल्ड कर शाहबाजपुर खालसा की जमीन का प्रस्ताव क्यों भेजा गया। यह फैसला जनहित के विपरीत है और स्वास्थ्य मंत्री को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कमेटी ने बताया कि 2019 में हरियाणा सरकार ने सिविल अस्पताल को नई जगह शिफ्ट करने का निर्णय लिया था। इसके लिए पहले गोकलगढ़ गांव की 5 एकड़ पंचायत जमीन चिह्नित की गई थी लेकिन सिविल सर्जन रेवाड़ी ने दो प्रमुख कारणों सीमित भूमि (केवल 5 एकड़) और रेलवे लाइन से घिरा क्षेत्र का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया था।
इसके बाद सिविल सर्जन ने भगवानपुर की जमीन को उपयुक्त बताया जो राष्ट्रीय राजमार्ग 71 से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।
निरीक्षण कर पूरी रिपोर्ट निदेशक पंचायत एवं विकास हरियाणा को 30 दिसंबर 2024 को भेजी थी। निदेशक ने मामूली तकनीकी आपत्ति के साथ रिपोर्ट लौटाई जिसे सुधारने की प्रक्रिया चल रही थी।
भगवानपुर ग्राम पंचायत ने भी 7 एकड़ 7 कनाल 9 मरला जमीन 1 रुपये प्रति एकड़ के भाव पर सरकार को सौंप दी जबकि 10 एकड़ भूमि पेयजल कार्यों के लिए रजिस्टर्ड कर दी गई।
कमेटी कहा है कि स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर 12 जून को बीडीपीओ रेवाड़ी को शाहबाजपुर खालसा की जमीन का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए जिससे भगवानपुर की फाइल रोक दी गई।
कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि भगवानपुर साइट पर अस्पताल बनाने की स्वीकृति शीघ्र नहीं दी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 11 नवंबर को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह मुद्दा फिर उठाया जाएगा।
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कमेटी ने नगर परिषद पर भी सवाल उठाए
कमेटी ने नगर परिषद पर भी सवाल उठाया कि जब सरकार वर्तमान सिविल अस्पताल को वहीं रखने की बात कह रही है तो 144 दिन बाद मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने की क्या जरूरत थी। इसे आंदोलन कमजोर करने और ग्रामीण-शहरी मतभेद पैदा करने की कोशिश बताया गया। कमेटी का कहना है कि शहर भी हमारा है, गांव भी हमारा है भगवानपुर ने तो शहर की प्यास बुझाने के लिए 10 एकड़ जमीन सरकार को दी, फिर उसके आभार के शब्द तक नहीं बोले गए। संघर्ष कमेटी ने कहा कि रेवाड़ी में वर्तमान अस्पताल की जगह तंग है, पार्किंग नहीं, ट्राॅमा सेंटर और अस्पताल के बीच ट्रैफिक भरा रास्ता है, बारिश में निचले स्तर पर पानी भर जाता है। ऐसे में नए सिविल अस्पताल का निर्माण जरूरी है।