जींद। बिकने के लिए नई अनाज मंडी में सरसों आने लगी है। मार्च के अंत तक गेहूं भी आने शुरू हो जाएगा। लेकिन किसानों को अपना अनाज खुले आसमान के नीचे डालना पड़ेगा, क्योंकि मंडी में शेड ही नहीं है। मंडी के शेड जर्जर हो चुके थे, जिनको कंडम घोषित करने के बाद हटा दिया गया था। अब नए शेड लगाने का काम चल रहा है, जो अगस्त के बाद पूरा हो पाएगा। मंडी में फसल आने लगी है, मगर उसे खुले आसमान के नीचे डाला जा रहा है। यदि बारिश हुई तो उसका भीगना तय माना जा रहा है।
नई अनाज मंडी में जो दो बड़े शेड स्थापना के समय लगाए गए थे वह जर्जर हो गए थे। नई अनाज मंडी 1990-1991 में बनाई गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने इसका उद्घाटन किया था। उस समय नई अनाज मंडी में दो बड़े शेड लगाए गए थे। यह शेड मंडी में आने वाले गेहूं और धान को बारिश तथा खराब मौसम से बचाने के काम आते थे। समय बीतने के साथ मंडी के शेड जर्जर हो गए और इन्हें पिछले साल कंडम घोषित कर उनकी जगह नए शेड लगाने की योजना बनी थी।
तीन करोड़ नौ लाख रुपये होंगे खर्च
नई अनाज मंडी में तीन करोड़ नौ लाख रुपये की लागत से नए शेड लगाए जा रहे हैं। इसके लिए हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड ने पिछले साल टेंडर जारी कर ठेकेदार को वर्क अलॉट किया था। ठेकेदार ने नई अनाज मंडी में शेड लगाने का काम शुरू कर दिया है। अक्तूबर तक इनके लगाने का काम पूरा होगा। इस साल किसानों को धान की फसल खुले आसमान के नीचे नहीं डालनी पड़ेगी, लेकिन गेहूं की फसल इस बार खुले आसमान के नीचे डालनी पड़ेगी।
मंडी में इक्का-दुक्का लोग सरसों लेकर आ रहे हैं। किसानों के लिए सभी प्रकार की व्यवस्थाएं करवा दी गई हैं। मंडी में शेड का निर्माण कार्य जल्द पूरा करवाया जाएगा। किसानों को कोई भी समस्या नहीं आने दी जाएगी। -संजीव कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी।