जींद। शहर के बाल भवन में शनिवार को हिंदी दिवस पर अमर उजाला की तरफ से संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मंच का संचालन कवि बलराज स्नेही ने किया। इसमें कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी भाषा का महत्व बताया से अवगत करवाया। कवि भारत भूषण ने कहा कि हिंद का प्राण है हिंदी, मेरा अभिमान है हिंदी, भारती मां की वीणा का गूंजता गान है हिंदी।
उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है। हमारे सुख-दुख में हमारी मातृभाषा ही काम आती हैं। हमारे कवियों ने भी हमारी मातृभाषा के बारे में बहुत कुछ लिखा है। हम केवल हिंदी तक सीमित नहीं रहे बल्कि आज के दौर में सभी भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए। प्रशासनिक स्तर पर आज तक हिंदी को वह सम्मान नहीं मिल पाया जो मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में हिंदी में काम होना चाहिए। सरकार को इसकी तरफ ध्यान देने की जरूरत है।
म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन की राष्ट्रीय प्रमुख महिला विंग सुशीला जांगड़ा ने एक दिन बोल्या जूता मेरा बात सुना दूं खरी-खरी, जिस दिन तै तनै मोल लिया था फिरता हूं मैं गली-गली। नरेश नरवाल ने नई उमंग नई तरंग नई आशा पर, गर्व करें हम हिंदी भाषा पर। कवि नरेश शर्मा ने मेरी शान है हिंदी, मेरी जान है हिंदी, सच बोलूं तो देश की पहचान है हिंदी। इस दौरान एडवोकेट मोर राजेश, कमलेश गोयत जैसे अनेक कवियों ने अपने मन के भाव से हिंदी के महत्व व हिंदी को बढ़ावा देने की सरकार से मांग की।
इस अवसर पर शंकुतला काजल, सुदेश सिवाच, जगदीश पांचाल, ओमप्रकाश चौहान, एमआर सेठी, रामकुमार अलेवा, राजकुमार नैन, संदीप कौशल, कदम सिंह राठी, श्मायरा, कुमारी चार्वी, दिनेश शर्मा, दीपिका बिंदल, आजाद जुलानी, सोनिया पांचाल, जगदीश ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी का महत्व व देश की हालातों का जिक्र किया।