कंडेला में आयोजित महिला पंचायत में उपस्थित महिलाएं। फाइल फोटो।
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जींद। एक साल तक चलने के बाद किसान आंदोलन स्थगित हो रहा है। इस दौरान जहां पुरुष किसानों ने मजबूती से आंदोलन को चलाया, वहीं महिला किसान भी उनके साथ खड़ी रहीं। एक साल में कितने ही ऐसे मौके आए, जब महिलाओं ने किसान आंदोलन को गति दी। इसके चलते ही जींद के कंडेला गांव में महिला पंचायत भी हुई। इसके अलावा महिलाओं ने ट्रैक्टर यात्रा भी निकली। वहीं भाजपा व जजपा नेताओं व मंत्रियों के विरोध में हमेशा ही महिलाएं अग्रिम मोर्चे पर रहीं।
बेशक समाज को पुरुष प्रधान माना जाता है, लेकिन किसान आंदोलन में महिलाओं की भागेदारी पुरुषों के बराबर की रही। इसके चलते कई ऐसी महिलाएं भी सामने आईं, जिन्होंने अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया। गांवों की साधारण महिलाओं ने चाहे मंच संभाला, चाहे मोर्चा दोनों ही जगह अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करवाई। इनमें भाकियू चढूनी की महिला जिलाध्यक्ष सिक्किम सफाखेड़ी, पूनम कंडेला, कविता, सुदेश कंडेला ऐसे नाम हैं, जिन्होंने किसान आंदोलन को नेतृत्व दिया।
महिलाएं सिर्फ घर के काम में नहीं, आंदोलन में भी आगे
खरकरामजी की पूर्व सरपंच कविता ने बताया कि महिलाओं ने किसान आंदोलन में अपनी खास भूमिका निभाई है। महिलाएं सिर्फ घर व खेत के काम में नहीं, आंदोलन में भी इस प्रकार की भूमिका निभा सकती हैं, उन्होंने यह दिखा दिया है। पुरुषों ने भी बराबर का मौका दिया है। हां आंदोलन ने महिलाओं को अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाई है।