13जेएनडी07: एसडीएम ग्रामीणों को पराली प्रबंधन को लेकर जागरूक करते हुए। स्रोत : प्रशासन
- फोटो : धरना स्थल पर मौजूद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व अन्य।
सफीदों। एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने बताया कि सरकार की ओर से पराली प्रबंधन कृषि उपकरणों जैसे सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर, जीरो टिल सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, बेलर जैसी मशीनों पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि किसानों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
फसल अवशेषों का उपयोग खाद या चारे के रूप में किया जा सके। एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों समेत उपमंडल के गांव खेड़ा खेमावती, मलिकपुर, रोहड़, मुआना, साहनपुर और जयपुर समेत अनेक गांतों का दौरा कर फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर किसानों को जागरूक किया।
एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने गांव मुआना में एक किसान के खिलाफ खेतों में आग लगाए जाने पर मौके पर ही एफआईआर भी दर्ज करवाई। उन्होंने कहा कि पराली या अन्य अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है।
इससे न केवल पर्यावरण को क्षति पहुंचती है, बल्कि पशुओं के लिए चारे की भी भारी कमी उत्पन्न हो जाती है। इसलिए फसल अवशेषों में आग लगाने से बचें। यह समस्या केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश और देश के पर्यावरण को प्रभावित करती है।
एसडीएम ने ग्राम सचिव और पटवारियों को प्रतिदिन गांवों के खेतों का दौरा करने और मुनादी के माध्यम से किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरपंचों के माध्यम से इस विषय पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए।
पुलकित मल्होत्रा ने कहा कि यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जाए। फसल अवशेषों को जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड और सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन होता है।