जींद। लघुसचिवालय पर आने वाले लोगों के लिए प्रशासन का फैसला भारी पड़ सकता है। लघु सचिवालय के छह में से चार गेट बंद हैं और दो में से एक गेट से ही ऊपर की मंजिलों से बाहर निकला जा सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि लघु सचिवालय में आग पर काबू पाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है लोगों को निकलने के लिए एक ही गेट का सहारा लेना पड़ेगा। तीन मंजिला लघुसचिवालय के गेट बंद होने के कारण अब मुख्य गेट ही बचा है, जिससे ऊपर की मंजिलों से निकला जा सकता है।
लघुसचिवालय में डीसी, एसडीएम, सिटीएम, जिला राजस्व अधिकारी, डीडीपीओ, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, कराधान जैसे महत्ववूर्ण कार्यालय ऊपर की मंजिलों पर हैं। इसे अलावा प्रथम तल पर नगरपरिषद, जिला खजाना, तहसील जैसे कार्यालय हैं। इन कार्यालयों में जाने के लिए एक मुख्य द्वार है, इसके अलावा लघुसचिवालय के पीछे की ओर चार द्वार हैं, जिनमें एक रैंप भी शामिल है, लघु सचिवालय की छत तक जाता है। इसके अलावा तहसील कार्यालय की तरफ के रास्ते खुले हैं, लेकिन इससे सिर्फ तहसील का ही जुड़ाव है। यदि ऊपर की मंजिलों में जाना हो तो फिलहाल लघु सचिवालय को मुख्य द्वार ही बचा हुआ है। इसके अलावा पीछे चारों द्वारों को बंद कर यहां ताला लगाया गया है। इसी साल जनवरी महीने में कोरोना संक्रमण बढ़ने के चलते प्रशासन द्वारा सभी गेट बंद कर एक ही रास्ता खुला रखा गया। अब कोरोना संक्रमण भी कम हो चुका है। इसके चलते कार्यालयों में पूरी क्षमता के साथ कर्मचारी भी पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद इन गेट को नहीं खोला गया है।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल
अधिकारियों की मानें तो यह व्यवस्था सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। लघुसचिवालय में एक हजार से अधिक कर्मचारी व अधिकारी दिन भर काम करते हैं। इसके अलावा पांच हजार से अधिक लोग प्रतिदिन अपने कामों के लिए आते हैं। यहां आग बुझाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यह व्यवस्था सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठा रही है।