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धरना दे रहे किसानों ने अब जुलाना को सब डिविजन बनाने की उठाई मांग

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कुरुक्षेत्र से नारनौल तक बनने वाले नेशनल हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन का मार्केट रेट देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने अब जुलाना को उपमंडल का दर्जा देने की मांग भी उठाई है।
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गौरतलब है कि किसान तीन महीने से किलाजफरगढ़ गांव में आंदोलन कर रहे हैं। अब किसानों ने अपने न्याय की लड़ाई के साथ-साथ जुलाना क्षेत्र के विकास की आवाज भी उठाने का फैसला लिया है। किसान नेता रमेश दलाल ने बताया कि आंदोलन में भाग ले रहे सभी किसानों ने इस मुद्दे को उठाने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि विकास के मामले में जुलाना पिछड़ गया है। इस क्षेत्र का जो विकास होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। जुलाना विकसित क्षेत्र बनने के सारे मापदंड पूरे करता है। जुलाना को सब डिविजन बनाने से ही क्षेत्र का विकास संभव होगा।
मुआवजे पर शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं किसान
दलाल ने कहा कि प्रशासन द्वारा घोषित संशोधित अवार्ड से किसान सहमत नहीं हैं। किसानों को मार्केट रेट से बहुत ही कम कीमत दी जा रही है। ऐसे में प्रशासन को जल्द ही वे दस्तावेज देने चाहिए, जिनके आधार पर मार्केट रेट तय किया गया है। उन्होंने कहा कि किसान इस मामले का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से चाहते हैं। इसके चलते ही रेल रोकने का फैसला स्थगित कर दिया गया है। अब हर वीरवार को धरने पर बड़ी संख्या में किसान पहुंचेंगे।
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भूरा-निघाइया का बने स्मारक
इस दौरान किसानों ने भूरा-निघाइया का स्माकर बनाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि भूरा और निघाइया ने 150 साल पहले किसानों के हित में छह महीने तक लड़ाई लड़ी थी। अंत में अपनी शहादत दी थी। गौरतलब है कि लजवाना गांव निवासी जींद रियासत के समय राजा द्वारा नाजायज लगान वसूलने के विरोध में कट्टर दुश्मन होने के बावजूद भूरा और निघाइया ने एक होकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इतना ही नहीं गांव में लगान वसूलने गए जींद रियासत के तहसीलदार कोरामल का ग्रामीणों ने सर कलम कर दिया था।
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