जींद। जिले में अभी मानसून की बारिश नहीं हुई है। मानसून की बारिश से पहले जिला प्रशासन ने दावे में बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया है, लेकिन यह फेल नजर आ रहा है।
जिला प्रशासन के पास 13 किश्तियां हैं, जिनमें से 10 कंडम हैं, जो इस्तेमाल करने के लायक नहीं है। इन किश्तियों को चलाने में इस्तेमाल होेने वाले इंजन की हालत भी दयनीय है।
हेड क्वार्टर पर रखे गए दोनों इंजन पूरी तरह दयनीय हालत में है। यदि बारिश के दिनों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई तो जिलावासियों की जान रामभरोसे हो जाएगी।
विभाग के पास खुद के गोताखोर भी नहीं है। यदि जरूरत पड़ी तो विभाग को निजी गोताखोरों की मदद लेनी पड़ेगी। जिला हेड हेड क्वार्टर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष में 8 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ या बारिश के दौरान कोई आपदा आने की सूचना देने के लिए जिला हेड क्वार्टर पर लैंडलाइन फोन नंबर 01681-245206 नंबर भी रखा हुआ है। खैर यह चालू हालत में मिला।
जिला राजस्व विभाग ने कंडम किश्तियों की मरम्मत करवाने के लिए मई में 7 लाख 38 हजार 278 रुपये का एस्टीमेट बनाकर सरकार के पास भेजा था, लेकिन एक माह बाद विभाग के पास रिप्लाई आया कि वह पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें टेंडर प्रक्रिया से गुजरना होगा, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी करने में बरसात का मौसम गुजर जाएगा।
जिला राजस्व विभाग ने सिंचाई विभाग समेत अन्य विभागों को बाढ़ की तैयारी के बारे में रिपोर्ट करने के बारे में पत्र जारी किया हुआ है। हर साल जुलाना क्षेत्र में बारिश के दौरान बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। इससे हजारों एकड़ फसल पानी में डूब जाती है। बारिश का पानी घरों तक पहुंच जाता है, लेकिन जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।