जींद। जिले में जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी व अधिकारी भी संक्रमित हो रहे हैं। अब तक नागरिक अस्पताल के आठ चिकित्सक संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से पांच चिकित्सक अब भी घरों पर ही क्वारंटीन हैं। जबकि तीन चिकित्सक कोरोना को मात दे चुके हैं। चिकित्सकों के पॉजिटिव आने का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन को 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं चलाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड में लगानी पड़ रही हैं।
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के 58 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 22 ही चिकित्सक कार्यरत है। इनमें से पांच चिकित्सक कोरोना संक्रमित होने के कारण घरों में क्वारंटीन हैं। सोमवार को केवल चार ही चिकित्सकों ने ओपीडी की। इसके अलावा 15 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारी जिनमें लैब तकनीशियन, हेल्पर व अन्य कर्मचारी भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। अस्पताल में स्टाफ नर्स के 90 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 60 नर्स अपनी सेवाएं दे रही हैं। इनमें से कुछ कोरोना संक्रमित हो चुकी हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को स्वास्थ्य सेवाएं देने में काफी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इमरजेंसी वार्ड में मेडिकल ऑफिसर की ड्यूटी लगाई जाती है।
मेडिकल ऑफिसर के संक्रमित होने के कारण अब अस्पताल प्रशासन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड में लगानी पड़ रही हैं ताकि इमरजेंसी वार्ड 24 घंटे चलता रहे। अस्पताल के एकमात्र ईएनटी विशेषज्ञ भी संक्रमित हो चुके हैं। इस कारण इनकी ओपीडी भी बंद हो चुकी है।
इमरजेंसी सेवा को संभालने के लिए चार चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई। 24 घंटे इमरजेंसी सेवा को चालू करने के लिए तीन चिकित्सकों का शेड्यूल नहीं बन पा रहा है। इसलिए अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी सेवाओं को चलाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई है, जो प्रतिदिन ओपीडी के साथ-साथ इमरजेंसी सेवाओं को संभालेंगे। इसके अलावा चिकित्सकों पर सैंपल लेने, ओपीडी करने का भी कार्यभार है। किसी भी सूरत में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
- डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।