सफीदों। कारखाना गांव स्थित एक तालाब का पट्टा रद्द होने के बाद भी एक साल से मछली पालन किया जा रहा है। अब मछली निकालने को लेकर छिड़े विवाद में ठेकेदार ने ग्राम सचिव पर आरोप लगाए हैं। हालांकि ग्राम सचिव ने आरोपों को नकार दिया है।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि एक साल तक बिना पट्टा के मछलियां पालने से ग्राम पंचायत को आर्थिक नुकसान हुआ है। जैसे ही मछलियां तैयार र्हुइं तो ग्राम सचिव व ठेकेदार में विवाद छिड़ गया है। सोमवार को ठेकेदार अपने मजदूरों को साथ लेकर तालाब से मछलियां निकालने पहुंचा तो ग्राम सचिव के साथ गांव कारखाना निवासी कुछ लोगों ने विरोध किया। इसके बाद ठेकेदार की कहासुनी हो गई। ठेकेदार नरेंद्र लांबा ने कारखाना गांव निवासी दो लोगों के खिलाफ सदर थाना में शिकायत दी है। इसमें कहा गया है कि ग्राम सचिव के कहने पर उसे मछलियां निकालने से रोका जा रहा है। साथ ही ठेकेदार ने आरोप लगाया उसे जान से मारने की धमकी दी गई है। साथ ही ग्राम सचिव व गांव कारखाना निवासी विनोद ने भी ठेकेदार नरेंद्र लांबा के खिलाफ बीडीपीओ को शिकायत दी है। जिस पर बीडीपीओ कीर्ति सिरोहीवाल ने ठेकेदार पर पट्टानामा रद्द होने के बावजूद भी मछली पालन करने पर कानूनी कार्रवाई के बारे में एसडीएम आनंद कुमार शर्मा को पत्र लिखा है।
2016 में दिया था आठ साल के लिए ठेका
ग्रामीणों ने बताया कि 2016 में ग्राम पंचायत कारखाना ने मादुवाले व खरड़ेवाले दोनों तालाबों को आठ वर्ष के लिए गांव हरिगढ़ निवासी राकेश को पट्टे पर दिया था। इसमें नरेंद्र लांबा राकेश का हिस्सेदार है। लेकिन खरड़े वाले तालाब में 2017 में मनरेगा की खुदाई चली। इस दौरान ग्राम पंचायत कारखाना से ठेकेदार ने 2018 में प्रस्ताव पास करवाया था। जिसमें पट्टानामा पूरा होने के बाद 10 माह तक ओर ठेकेदार को तालाब मछली तैयार करने का समय दिया जाएगा। साथ ही मादुवाले तालाब सन 2020 में खुदाई चली। ऐसे ठेकेदार के व्यापार में करीब दो साल का नुकसान हुआ। जिसके बाद ठेकेदार ने 28 दिसंबर 2020 को ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास करवाकर अपना पट्टा नामा रद्द करवा लिया। इसके बाद भी तालाब दोनों तालाबों का पट्टानामा रद्द होने के बाद खरड़े वाले तालाब में मछलियां तैयार हो रही हैं।
सात लाख की मछलियां मरने की स्थिति में
ठेकेदार नरेंद्र लांबा ने आरोप लगाया कि मादुवाले तालाब की तीन-तीन लाख रुपये की दो किस्त बकाया थी। ग्राम सचिव ने उससे पांच लाख 72 हजार रुपये लेकर दोनों तालाबों की किस्तें वसूल कर ली थी और उच्चाधिकारियों से उसका पट्टानामा रद्द करवाया था। इसमें ग्राम सचिव के कहने पर तालाब में मछली के बीज डाले थे। इसके बाद उसने तालाब के चारो ओर मिट्टी व पाइप लाइन डलवाने में करीब ढाई लाख रुपये खर्च किए। ग्राम सचिव ने बिल लेकर किस्तों में काटने की बात कही थी। जैसे की वह बिल लेकर पहुंचा तो ग्राम सचिव ने 50 हजार रुपये की मांग की। ठेकेदार का कहना है कि इससे तैयार हो चुकी करीब सात लाख रुपये की मछली मरने की स्थिति में हैं।
28 दिसंबर 2020 को राकेश के नाम का पट्टा रद्द हो चुका है। इसमें हिस्सेदार नरेंद्र लांबा गांव कारखाना के तालाब में नाजायज तरीके से मछली तैयार कर रहा है। नरेंद्र लांबा की मादुवाले तालाब की तीन लाख 5165 रुपये की दो किस्त भी बकाया है। पैसे मांगने या कोई डील के आरोप निराधार है। अगर उसने पैसे दिए हैं तो उनकी रसीद दिखाएं।-अनिरुद्ध, ग्राम सचिव कारखाना।
पुलिस को कार्रवाई का आदेश
यह शिकायत बीडीपओ से आई है। पत्र अनुसार मामले में पट्टानामा रद्द होने के बावजूद भी मत्स्य पालन करने का मामला है। अगर ठेकेदार ने ग्राम सचिव को पैसे दिए हैं तो वह उसके सामने दोनों पक्षों की बैठक में आकर कोई भी सबूत रख सकता है। कार्रवाई के लिए पुलिस को आदेश दिए गए हैं।-आनंद कुमार शर्मा, एसडीएम।