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किसानों ने खुद संभाला रेलवे संपत्ति की रक्षा का जिम्मा

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बरसोला रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन पर डटीं महिलाएं। - फोटो : Jind
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जींद/ सफीदों/उचाना/नरवाना/जुलाना। कृषि कानूनों के विरोध में वीरवार को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रेल रोको आंदोलन किया गया। इस दौरान किसानों ने चार घंटे तक रेलवे लाइन पर बैठकर रोष जताया। वहीं महिलाओं ने लोकगीतों से केंद्र सरकार को कोसा। रेलवे संपत्ति को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हो, इसके लिए खुद किसानों ने मोर्चा संभाला। इसके लिए युवाओं की टीम बनाई गई थी। वहीं, सुरक्षा के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क रही।
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नरवाना में किसानों ने हिसार-चंडीगढ़ बाईपास पर बने रेलवे पुल के नीचे चार घंटे तक धरना दिया। किसानों ने दोपहर 12 बजते ही रेलवे लाइन पर डेरा डाल लिया और दोपहर बाद चार बजे तक रेलवे ट्रैक पर डटे रहे। किसान नेता बलवीर सिंह, होशियार सिंह, रणधीर मोर, नरेश दनोदा ने कहा कि सरकार के साथ 11 दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। किसानों ने कहा कि रेल रोकने का मकसद सरकार को चेताना है न कि सरकारी संपतियों को नुकसान पहुंचाना।
वहीं उचाना के खटकड़ टोल पर चल रहे धरने में शामिल किसान वीरवार को बरसोला स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर बैठे। दोपहर 12 बजे से लेकर शाम चार बजे तक रेलवे मार्ग जाम रखा। यहां भारी संख्या में महिलाएं भी पहुंची। धरने की अध्यक्षता खटकड़ गांव की बुजुर्ग महिला कृष्णा देवी ने की। रेलवे ट्रैक पर हुक्का पीने के साथ-साथ किसानों ने ताश खेल कर चार घंटे बिताए। ट्रैक जाम के दौरान किसानों ने रागनी भी सुनी। बरसोला गांव द्वारा लंगर की व्यवस्था की गई। सुबह खटकड़ गांव के टोल पर किसान एकत्रित हुए। धरना कोर ग्रुप द्वारा बरसोला गांव के लोगों के सहयोग से लंगर व्यवस्था की गई थी ताकि कोई यात्री ट्रेन अगर ट्रैक जाम के कारण रुके तो यात्रियों को चाय, पानी व खाना वितरित कर सकें। इस मौके पर फूल सिंह श्योकंद, बिजेंद्र सिंधु, राकेश खटकड़, अनूप करसिंधु, अमरजीत, किस्मत पूनिया, सूरजभान घसो, जयप्रकाश, अनीष, रमन बरसोला, रामनिवास, सूरजमल, कैप्टन वेद, कमला जुलानी, पनमेश्वरी देवी, सुमित्रा, संतोष आदि मौजूद रहे।
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कृषि कानूनों को वापस ले केंद्र सरकार : कुंडू
जींद। इनेलो के जिला प्रधान एवं पूर्व विधायक रामफल कुंडू ने कहा कि केंद्र द्वारा लागू किए गए तीन काले कानूनों से आज पूरे देश का किसान इस काले कानून से नाराज है। उन्होंने कहा कि देश ओर प्रदेश का अन्नदाता खुश नहीं रहेगा तो कमेरा, व्यापारी व कर्मचारी खुश नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसानों व व्यापारियों ने सरकार से कृषि कानूनों की मांग ही नहीं की तो क्यों केंद्र सरकार इन कानूनों को थौपने पर लगी हुई है, जबकि 85 प्रतिशत लोग किसानी पर आधारित है।

नरवाना में रेलवे ट्रैक पर बैठी महिलाएं। संवाद- फोटो : Jind

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