मंडी अटेली। भारत कृषि प्रधान देश है लेकिन यहां के किसानों की स्थिति बहुत खराब है। वे अपनी फसल को बेचने के लिए मंडी में जाते हैं लेकिन उन्हें उचित दाम नहीं मिलता। एमएसपी रेट पर फसल की बिक्री न होने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
इसको लेकर अटेली में किसानों के साथ बातचीत की गई तो किसानों ने कहा कि सरकार को एमएसपी रेट पर फसल खरीदनी चाहिए और उन्हें उचित दाम देना चाहिए। इसके अलावा मंडी में टोकन और गुणवत्ता की समस्या को भी हल करना चाहिए।
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हम अपनी फसल को बेचने के लिए मंडी में जाते हैं लेकिन हमें उचित दाम नहीं मिलता। एमएसपी रेट पर फसल की बिक्री न होने के कारण हमें नुकसान उठाना पड़ता है। -किसान नवीन कुमार।
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मंडी में टोकन और गुणवत्ता को लेकर हमें अपनी फसल को कम कीमत पर व्यापारियों को बेचनी पड़ती है। उचित रेट पर न तो फसल की बिक्री होती है और न ही कोई मुआवजा मिलता है। सरकार को एमएसपी रेट पर फसल खरीदनी चाहिए। -किसान महावीर सिंह तंवर।
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सरकार द्वारा हमारे बाजरे को 2775 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मजबूरीवश हमें अपनी फसल ओने पौने दाम पर आढ़तियों को बेचनी पड़ रही है। -किसान युधिष्ठिर।
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हमें हमारी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण खाद बीज खरीदने में दिक्कत हो रही है। मंडी में टोकन और गुणवत्ता की समस्या को भी हल किया जाए। -किसान जितेंद्र राठौड़।
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हमें आढ़तियों को महज 1800 रुपये में बाजरा बेचना पड़ रहा है। सरकार द्वारा 2775 रुपये प्रति क्विंटल की खरीद की घोषणा की गई थी। 575 रुपये भावांतर की घोषणा भी हुई है। हमें अभी तक कुछ नहीं मिला। -किसान बलबीर सिंह।