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Jind News: मार्केट कमेटी में चल रहा किसानों का धरना खत्म, अब चंडीगढ़ कूच की तैयारी

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21जेएनडी23: शहर की अनाजमंडी में राकेश टिकैत किसानों को आगामी रणनीति के बारे में जानकारी देते हु
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जींद। फसल खरीद के नए नियमों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन का नई अनाज मंडी मार्केट कमेटी कार्यालय में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को 15वें दिन समाप्त हो गया है।
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भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों के बीच पहुंचकर आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का एलान किया। उन्होंने 27 मई को चंडीगढ़ में बड़ी महापंचायत करने की घोषणा की।
इस दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने किसानों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने धरना स्थल पर बनी 10 सदस्यीय कमेटी के साथ बंद कमरे में लगभग आधे घंटे तक रणनीतिक मंथन किया।
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बैठक के बाद मंच से संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि अब समय आ गया है कि किसान अपने आंदोलन को और मजबूत करने के लिए चंडीगढ़ की ओर कूच करें। महापंचायत की तिथि की औपचारिक घोषणा जल्द की जाएगी जबकि 27 मई को बड़ी बैठक का कोडवर्ड साझा किया।
टिकैत ने किसानों को निर्देश दिए कि चंडीगढ़ कूच से पहले प्रदेश के सभी जिलों में बैठकें आयोजित कर रणनीति तैयार की जाए ताकि अधिक से अधिक किसान इस आंदोलन से जुड़ सकें। टिकैत ने कहा कि यदि चंडीगढ़ जाते समय कहीं भी पुलिस किसानों को रोकती है तो किसान वहीं अपना डेरा डालकर धरना शुरू कर देंगे।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि किसानों की मांगों को लेकर संवाद की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा गया था लेकिन उचित समय और स्थान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इस अवसर पर भाकियू के जिलाध्यक्ष बिंद्र नंबरदार, महासचिव राजेंद्र पहलवान, रामराजी ढुल, सतेंद्र कोथ, गुरनाम, प्रकाश लोहान, जयबीर, जोगिंद्र नैन, अजमेर और सुरेश कोथ मौजूद रहे।

चौटाला परिवार एकजुट होता तो कोई भी चुनौती देने की हिम्मत नहीं करता : टिकैत
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के साथ चल रहे विवाद पर टिकैत ने कहा, पहले चौटाला परिवार को एकजुट होना चाहिए। यदि परिवार एक होता तो कोई भी उन्हें चुनौती देने की हिम्मत नहीं करता। टिकैत ने सलाह दी कि दुष्यंत चौटाला को पहले अपने गांव जाकर परिवार से चर्चा करनी चाहिए और फिर किसानों के बीच आना चाहिए। यदि किसान आंदोलन के दौरान दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री पद छोड़ देते तो आज यह नौबत नहीं आती। उनका देवीलाल से नाता रहा है। अगर वह परिवार के साथ एक होकर हरियाणा के किसानों के पास आएं तो किसान ही इस पर फैसला लेंगे।
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