पेगां पैक्स मामले को लेकर पंचायत करते ग्रामीण।
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संडील गांव के किसानों द्वारा टंकी से कूदकर जान देने की चेतावनी देने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। बुधवार को जिला प्रशासन द्वारा जींद में संडील गांव के किसानों के साथ बैठक करने की बात कही तो ग्रामीणों ने गांव के स्कूल में ही बैठक कर उनके भेजे गए प्रस्ताव को ठुकरा दिया। वहीं इस मामले में बुधवार को डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने अधिकारियों के साथ बैठक कर आदेश दिया कि पूरे मामले में पारदर्शी तरीके से जांच की जाय। इसके लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
जानकारी के लिए दिसंबर में संडील गांवों के किसानों ने पेगां पैक्स में घोटाले का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि पैक्स कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलीभगत कर उनके खातों से खुद ही नकदी व खाद जारी करवा लिया। जब मामला खुला तो कुछ अधिकारियों ने इसे दबाने का भी प्रयास किया। तभी से किसान इस मामले में जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
करीब एक महीना पहले संडील गांव के किसानों ने ऐलान किया था कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे गांव के जलघर की टंकी पर चढ़कर कूदकर आत्महत्या कर लेंगे। इसके बाद प्रशासन अब हरकत में आया है। किसानों ने कहा कि अधिकारियों द्वारा बैठक में न्याय दिलाने की बजाय उन्हें गालियां दी जाती हैं। समाजसेवी बलजीत ने कहा कि जिला प्रशासन करीब नौ माह से उनको न्याय देने की बजाय जलील कर रहा है। गांव के लोगों को कभी थाने तो कभी डीसी कार्यालय में बुलाया जाता है। न्याय दिलवाने की बजाय उन्हें धमकाया जाता है। घोटाले से पर्दाफाश करने के आज तक भी गांव के लोगों को किसी कार्य के लिए बैंक का नो ड्यूज तथा खेती के लिए खाद आदि के लिए भी तरसना पड़ रहा है। घोटाले के आरोपी बैंकों तथा पैक्सों में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रिकार्ड जलाया जा चुका है, लेकिन पुलिस द्वारा रिकार्ड जलाने से संबंधित धाराएं अभी तक एफआईआर में ईजाद नहीं की गईं, ताकि आरोपी मामले का फायदा उठा सके। दिसंबर से अब तक जांच एजेंसी शुरुआत दौर भी पूरा नहीं कर पाई है। सहायक रजिस्ट्रार की रिपोर्ट में भी पैक्स कर्मचारियों के अलावा बैंक कर्मचारी व पूर्व शाखा प्रबंधक जांच में दोषी पाए गए हैं। लेकिन मामले की जांच कर रही स्पेशल टीम ने चार आरोपियों को छोड़कर बैंक के किसी कर्मचारी या अधिकारी को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया है। अब गांव के लोग न्याय के लिए कोई भी कदम उठा सकते हैं। इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन तथा सरकार की होगी।
इस मामले में बुधवार को सहकारिता विभाग और पुलिस के अधिकारियों के साथ मीटिंग हुई है। कई महत्वपूर्ण तथ्य आए हैं। अब आदेश दिए गए हैं कि पूरे मामले की जांच पारदर्शी तरीके से हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
इस बारे में जींद में अधिकारियों की मीटिंग हुई है। मुझे भी मीटिंग में बुलाया गया था, लेकिन ग्रामीणों ने फैसला किया कि हम प्रशासन के पास बहुत बार जा चुके हैं। हर बार बेइज्जत किया गया है। ऐसे में यदि प्रशासन गांव में आकर जांच करे तो ठीक नहीं, तो किसान अपने फैसले पर अडिग हैं।
बलजीत सिंह, किसान।