10जेएनडी12 : सुबह के समय जींद के आसपास छाया स्मॉग। संवाद
जींद। जिले में लगातार पर्यावरण प्रदूषित रहने के चलते हवा जहरीली हो गई है। प्रशासन ने पर्यावरण प्रदूषण को रोकन के लिए फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाई हुई है, लेकिन शहर का वातावरण इतना प्रदूषित हो चुका है कि दोपहिया वाहन चलाते समय आंखों से पानी रुकने का नाम नहीं लेता है। जरा सा परिश्रम करते ही सांस फूलने लग रही है।
रविवार को जींद का एक्यूआई औसतन 240 के आसपास रहा। सुबह के समय वातावरण में स्माॅग भी छाया रहा। अधिकतम तापमान 30 डिग्री तो न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस रहा। दोपहर के बाद हवा की गति बढ़ने से वायु प्रदूषण कुछ कम हुआ। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दो दिन तक मौसम शुष्क रहेगा और हवा की गति में उतार-चढ़ा होगा।
पिछले एक पखवाड़े से जींद की हवा सांस के रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक बनी हुई हे। आंखों में लगातार प्रदूषण के कण जाने से जलन बढ़ रही है। विशेषकर दमा के मरीजों को इस मौसम से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
एक्यूआई 0 से 50 तक स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद होता है। इसका मतलब है कि जिस वायु हम सांस के रूप में ले रहे हैं, वह बिल्कुल शुद्ध है। 51 से 100 तक संतोषजनक होता है। 101 से 200 तक मध्यम होती है। इसका मतलब है कि इस स्तर तक का एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए लाभदायक नहीं होता तो नुकसानदायक भी नहीं होता है। 201 से 300 तक वायु को दूषित माना जाता है। इस स्तर के वायु प्रदूषण में सांस लेने से अस्थमा रोगियों को परेशानी हो सकती है। 301 से 400 तक वायु का स्तर काफी खराब हो जाता है। इसमें लोग बीमार पड़ सकते हैं। उनको फेफड़ों की बीमारी हो सकती है। 401 से 500 तक यदि वायु का प्रदूषण पहुंच जाए तो यह काफी घातक साबित हो सकता है। इस स्तर के वायु प्रदूषण के कारण पहले से बीमार व्यक्ति की मौत भी हो सकती है या फिर उसके फेफड़ों पर विपरीत असर पर पड़ता है। इस वायु प्रदूषण के स्तर से स्वस्थ लोग भी बीमार पड़ सकते हैं। जिले में इस समय वायु का प्रदूषण 240 तक पहुंच चुका है। यानी अस्थमा रोगियों के लिए यह स्तर काफी खतरनाक साबित हो सकता है।
सांस के रोगियों के लिए खतरनाक प्रदूषण : डॉ. भोला
नागरिक अस्पताल के डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. राजेश भोला ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण से रोग प्रतिरोध क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में प्रदूषण के दौरान सीधे हवा के संपर्क में आने से बचें। आंखों को बार-बार सामान्य पानी से साफ करते रहें। अधिक खुजली या जलन होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ को ही दिखाएं। सांस लेने में कठिनाई हो तो तुरंत चिकित्सक से उपचार करवाएं।
10जेएनडी12 : सुबह के समय जींद के आसपास छाया स्मॉग। संवाद