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डॉ. पांचाल ने 16 हजार से ज्यादा सैंपल लेने पर भी खुद को रखा स्वस्थ

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जींद। कोरोना काल परेशानी भरा रहा लेकिन इस संक्रमण काल ने ऐसी प्रेरणा दी, जिसको भुला पाना ता उम्र मुश्किल होगा। संकट के इस समय में ऐसे कई उदाहरण हैं, जो आज प्रेरणास्रोत बने हैं। नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. रमेश पांचाल ने कोविड-19 से ग्रस्त लोगों के संपर्क में आने के बाद भी खुद को स्वस्थ रखा। अब तक वे 16 हजार से ज्याद संदिग्ध लोगों के सैंपल ले चुके हैं। इस दौरान खुद को संक्रमण से बचाने की चुनौती को उन्होंने अपने हौसले से जीता। उन्होंने जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जाकर अपने साथियों को भी सैंपल लेने की ट्रेनिंग दी।
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नागरिक अस्पताल में एक अप्रैल को डॉ. रमेश पांचाल ने सैंपलिंग का काम संभाला। उन्हीं के लिए सैंपल में से जिले का पहला कोरोना संक्रमित मिला। लगातार जिले में बढ़ रहे संक्रमितों की संख्या के बाद भी डॉ. रमेश पांचाल कभी नहीं घबराए और अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभाई। अस्पताल प्रशासन ने डॉ. रमेश पांचाल की ड्यूटी मोबाइल टीम में लगा दी। प्रतिदिन मोबाइल टीम शहर के विभिन्न सरकारी कार्यालयों के अलावा संस्थाओं के पास जाकर सैंपल करने लगी। डॉ. रमेश पांचाल ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती अपने आपको संक्रमण से बचाने की थी। बीच-बीच में वह खुद भी अपनी जांच करवाते रहे। डॉ. पांचाल ने कहा कि सबसे बड़ी दिक्कत पीपीई किट पहने रखने की थी। 35 से 42 डिग्री तापमान में पीपीई किट पहने रखना बड़ी समस्या थी,लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
संक्रमण से बचाने के लिए डॉ. चंद्रमोहन ने बनवाया शीशे का फ्रेम
कोरोना के शुुरुआती दौर में नागरिक अस्पताल में सैंपल लेने में सभी घबरा रहे थे। खुद को संक्रमित होने के डर से कुछ चिकित्सक सैंपलिंग का काम करने से इनकार तक कर गए। ऐसे में साथियों का हौसला बढ़ाने और संक्रमण से बचाने के लिए सर्जन डॉ. चंद्रमोहन ने शीशे का एक फ्रेम बनाकर नागरिक अस्पताल को भेंट किया। डॉ. चंद्रमोहन ने कहा कि उन्हें इस प्रकार के बॉक्स चीन के चिकित्सकों के पास देखे थे। टीवी पर चीनी चिकित्सकों द्वारा सैंपल लेने के तरीके को देखकर वे एक कारीगर के पास पहुंचे और शीशे का फ्रेम तैयार करवाया। शीशे के फ्रेम से चिकित्सक मरीज की छींक, खांसी से बचे रहे और जींद में कभी कोई सैंपल लेने वाला चिकित्सक संक्रमित नहीं हुआ।
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बिना प्रशिक्षण लिए ओमपाल ढांडा ने एंटीजन किट से लिए सैंपल
लैब तकनीशियन ऑफिसर ओमपाल ढांडा ने कभी सोचा नहीं था कि वह आरटीपीसीआर लैब में सैंपल की जांच करेंगे। कोरोना ने इस लैब में काम करने के साथ-साथ इसमें महारत हासिल करवा दी। ओमपाल ढांडा ने जिले में सबसे पहले बिना किसी ट्रेनिंग के ही एंटीजन किट से सैंपल लेने और एंटी बॉडी की जांच करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
ओमपाल ढांडा ने बताया कि उन्होंने एक वीडियो देखकर एंटीजन किट से सैंपल लिया। इसके बाद उन्होंने दूसरे चिकित्सकों और लैब तकनीशियनों को सिखाया। जिले में आरटीपीसीआर लैब बनने की घोषणा हुई तो ओमपाल ढांडा को ही इसके निर्माण और कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। ओमपाल ढांडा तीन बार नागरिक अस्पताल अंबाला में इस तकनीक को देखने के लिए गए। इसके बाद मेडिकल कॉलेज खानपुर में भी गए। रोहतक पीजीआई में सैंपलों की जांच की ट्रेनिंग ली। इसके बाद नागरिक अस्पताल उचाना में आरटीपीसीआर लैब में सैंपलों की जांच शुरू की। लैब का प्रभारी बायोलोजिस्ट डॉ. जेके मान को सौंपा गया।
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