जींद। असमर्थ महिला कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक पंडित रामनिवास अहिरका ने नरवाना रोड पर संस्था के कार्यालय में वीरवार को गायत्री यज्ञ किया। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को निष्काम भाव से दिया दान समय आने पर उसके दाता को कई गुना होकर मिलता है इसलिए दानी लोगों के घर सदैव धन से भरे रहते हैं। उनके घर में किसी चीज की कमी नहीं रहती और वे सदैव उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि धन की दान, भोग और नाश तीन गति होती है जो धन जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद उसका कुछ अंश निष्काम भाव से पात्र जरूरतमंदों को दान देने के बाद बचता है। अमृत के समान पवित्र और टिकाऊ होता है, जिस प्रकार भूमि से निकलने वाले खनिज पदार्थों को जब तक अग्नि में न तपाया जाए वे अशुद्ध रहते हैं।
मानव जीवन में धन की शुद्धि के लिए दान बहुत जरूरी है। जो व्यक्ति न तो धन का सदुपयोग करते हैं और न जरूरतमंदों को दान देते हैं, वे धन की तीसरी गति नाश को प्राप्त होने के लिए जमा करते है। ऐसा धन व्यर्थ के लड़ाई-झगड़े करवाता है या डाकू चोरों द्वारा लूट लिया जाता है। इसी प्रकार उपजाऊ भूमि में समय पर बोया बीज फसल पकने पर हमें कई गुना होकर मिलता है।