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शरीर व मन के रोग लोभ से पैदा होते हैं : अतिमुक्त मुनि

Mon, 12 Jan 2026 12:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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11जेएनडी21: जैन मुनि के विहार में शामिल होने वाले अनुयायी। स्रोत पुजारी।
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जींद। जींद से विहार करके उचाना मंडी की 22 पंथ एसएस जैन सभा स्थानक पहुंचे गुरु अरुण चंद्र महाराज के शिष्य अतिमुक्त मुनि ने लोभ को दुख का कारण बतलाते हुए कहा कि शरीर व मन के रोग लोभ से पैदा होते हैं। लोभ की मात्रा घटती नहीं लेकिन दिनों दिन घटने के बजाय निरंतर बढ़ती चली जाती है।
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प्रभु महावीर ने कहा ज्यों-ज्यों लाभ होता है त्यों-त्यों लोभ और अधिक मात्रा में बढ़ता चला जाता है। आज तक जितने भी युद्ध, मन मुटाव, हिंसा, अत्याचार या अनाचार हुए हैं उसके पीछे एक ही कारण लोभ का रहा है। इंसान की इच्छाएं अनंत होती हैं जो कदापि पूर्ण नहीं हो पाती। इंसान खाली हाथ आता है एवं एक दिन खाली हाथ ही प्रस्थान कर जाता है।
उन्होंने कहा कि लोभ तन, मन, धन, जमीन जायदाद या पद प्रतिष्ठा का नाना भांति जीवन में प्रकट होता रहता है। मन में हजारों कल्पनाएं उभरती रहती है। प्रभु महावीर ने इस लोभ को जीतने के लिए संतोष का मार्ग बतलाया। वस्तुओं की मर्यादाओं से ही मन पर काबू पाया जा सकता है।
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राजा महाराजाओं के युद्ध इसी लोभ के चलते हुए हैं। खाने को कहा जाता है तो दो रोटी की जरूरत पड़ती है। फिर पता नहीं इंसान इतना लोभ में क्यों डूबा जा रहा है। कृपण व्यक्ति के पास लक्ष्मी आ भी जाए फिर भी वह इसका उपयोग नहीं कर पाता। लोभ को पाप का बाप भी कहा जाता है। सारे पाप इसी के इर्द गिर्द घूमते रहते है। सोमवार को उचाना विहार करके बिठमड़ा अतिमुक्त मुनि, अभिनंदन मुनि पहुंचेंगे। इस मौके पर अभिनंदन मुनि, सौरभ जैन, सुभाष कापड़ो, दीपक जैन, धीरा शर्मा, सुशील बुडायन, राममेहर जैन, नवीन शर्मा मौजूद रहे।
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