जींद। जिले में दिवाली से पहले ही धुएं की परत छा गई है। सुबह-शाम चारों तरफ धुआं ही नजर आता है। इससे सांस लेना मुश्किल हो रहा है। सरकार की ओर से रोक के बावजूद पराली जलाने के मामले रुक नहीं रहे हैं तो प्रशासन की तरफ से सड़कों पर पानी का छिड़काव भी बंद करवा दिया गया है। इसके कारण सड़कों पर वाहनों के चलने से धूल उड़ती रहती है।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान-2 (ग्रैप) की पाबंदियां लागू होने के बाद भी पर्यावरण मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके चलते शहर में एक्यूआई 380 के ऊपर पहुंच गया है। इसके अलावा कई स्थानों पर कूड़ा जलता हुआ मिला है। इस दौरान निर्माण कार्यों की सामग्री खुले में हवा के साथ जहर घोल रही है। वहीं लोग पर्यावरण मानकों का जमकर उल्लंघन कर रहे हैं। निर्माण कार्य भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। शहर में सरकारी कार्यों को भी नहीं रोका गया है।
पुरानी सब्जी मंडी के पास चल रहा पगडंडी पर पत्थर लगाने का कार्य बिना रोक-टोक के चल रहा है। वहां पर पूरे दिन पत्थर काटने और तराशने के कारण धूल उड़ती रहती है। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है।
सुबह-शाम सैर करने से बचें
जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ने का असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। लोग अब सुबह-शाम सैर करने से बचना चाहिए। हर्बल पार्क में रोजाना सैकड़ों लोग सुबह-शाम सैर करने के लिए आते हैं। अब वहां सैर करने वालों का आंकड़ा घटकर आधा रह गया है। वहीं शहर के अन्य पार्कों में पहले की तरह भीड़ नजर नहीं आ रही है। केवल युवा ही पार्कों में दिखाई देते हैं, जबकि पहले बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शाम और सुबह एक से दो घंटे पार्कों में ही बिताते थे।
पिल्लूखेड़ा और नरवाना में आ रहे पराली जलाने के मामले
जिले के पिल्लूखेड़ा और नरवाना क्षेत्र में पराली जलाने के मामले रोजाना आ रहे हैं। इन क्षेत्रों में रात के समय पराली जलाई जा रही है, लेकिन कृषि विभाग की टीम वहां तक पहुंच नहीं रही है। शाम के समय तो वातावरण में धुआं होने के कारण वाहन चालकों को परेशानी होने लगी है। धुएं के कारण आंखों में जलन होने लगती है। बाइक और साइकिल चलाने वाले लोगों को ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि पराली जलाने के मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो दिवाली पर पटाखों के धुएं से हालात और भी गंभीर हो जाएगी।
जिले में रविवार को पराली जलाने का एक मामला आया था। किसान को नोटिस दिया गया है। यदि जुर्माना नहीं दिया गया तो एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। अब तक 53 मामले पराली जलाने के आ चुके हैं। 31 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। -डॉ. गिरीश नागपाल, उपनिदेशक, कृषि विभाग, जींद।
28जेएनडी23-पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के एक गांव के खेतों में लगाई गई आग। संवाद