19जेएनडी03:दुकानों के बाहर लगी माता की लाल चुनरी और रखे नारियल। संवाद
जींद। चैत्र नवरात्र के पहले दिन वीरवार को घर-घर में विधि-विधान से कलश (घट) स्थापना की गई। मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रही। जय माता दी और सांचे दरबार की जय के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया है।
सुबह से ही मंदिरों में भक्त लंबी कतारों में खड़े नजर आए। भक्तों ने माता रानी को जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिरों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा।
कई मंदिरों को विशेष रूप से रंग-बिरंगी लाइटों और सुगंधित फूलों से सजाया गया है जिससे उत्सव की छटा देखते ही बन रही है। श्रद्धालुओं ने शुभ मुहूर्त में अपने घरों के पूजा स्थलों पर मिट्टी के पात्र में जौ बोए और विधिवत कलश की स्थापना की। साथ ही अखंड ज्योत प्रज्वलित कर नौ दिनों के कठिन व्रत का संकल्प लिया गया।
कैथल रोड स्थित हनुमान मंदिर के पुजारी ज्योतिष सोमनाथ का कहना है कि चैत्र नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। इस बार नवरात्र पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं जो भक्तों के लिए कल्याणकारी सिद्ध होंगे। नवरात्रों में माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी जिसका समापन रामनवमी के उत्सव और कन्या पूजन के साथ होगा।
बाजार में माता की चुनरी और नारियल की मांग
शहर के बाजार में रौनक देखने को मिल रही है। बाजारों में माता की चुनरी, नारियल, श्रृंगार सामग्री और मूर्तियों की भारी मांग बढ़ गई है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार माता के श्रृंगार के लिए सुंदर वस्त्र और चूनरी खरीदते नजर आए। साथ ही कुट्टू का आटा, साबूदाना और मौसमी फलों के दामों में भी वृद्धि के बावजूद ग्राहकों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। पूजा सामग्री धूप, दीप, घी और हवन सामग्री की दुकानों पर सुबह से ही भीड़ जुटी रही।