26जेएनडी30-पांडू पिंडारा स्थित तीर्थ का फोटो। संवाद
जींद। हिंदू पंचांग के अनुसार अप्रैल माह की वैशाख अमावस्या रविवार को है। वैशाख अमावस्या पर लोग अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन इन कामों को करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
साथ ही पितरों की कृपा से जीवन में सुख व समृद्धि बनी रहती है। अगर वैशाख अमावस्या के दिन पितृ तर्पण किया जाए तो वह बेहद लाभदायक होता है। अमावस्या तिथि रविवार देर रात एक बजकर एक मिनट तक रहेगी। 27 अप्रैल को रात 12 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। साथ ही 27 अप्रैल को रात 12 बजकर 39 मिनट तक अश्विनी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा वैशाख अमावस्या पर श्रद्धालु पिंडारा तीर्थ में स्नान कर पितरों का तर्पण करेंगे। पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर रविवार को वैशाख अमावस्या पर श्रद्धालु सरोवर में स्नान और पिंडदान करके करके तर्पण करेंगे। पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। अमावस्या के दिन पितरों को जल अवश्य अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद हमारे जीवन पर बना रहता है। इस दिन पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। रविवार को बैसाख अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और दिन की शुरुआत देवी और देवता के ध्यान से करें। इसके बाद पवित्र नदी या फिर घर में स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। पितरों का तर्पण करें। इसके अलावा पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत भी रखें और मंत्रो का जाप करें। अंत में अपनी श्रद्धा अनुसार विशेष चीजों का जरूरतमंदों को दान करें।