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डिजिटल क्रांति के बावजूद भौतिक पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ : डॉ. अनिल

Thu, 12 Feb 2026 12:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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11जेएनडी25: सीआरएसयू में लगी प्रदर्शनी में पुस्तक देखते बाहर से आए लोग। संवाद
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय आयोजित दो दिवसीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन समापन हुआ। विश्वविद्यालय में सजे इस ज्ञानोत्सव में न केवल जींद बल्कि आसपास के क्षेत्रों के शिक्षाविदों ने भी शिरकत की। मेले के दूसरे दिन का माहौल पूरी तरह शैक्षणिक ऊर्जा से लबरेज रहा जहां विद्यार्थियों से लेकर गैर शिक्षण कर्मचारियों तक ने पुस्तकों की दुनिया में रुचि दिखाई।
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इस पुस्तक मेले देश-विदेश के 65 प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने हिस्सा लिया। स्टॉलों पर प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध, साहित्य, व्यक्तित्व विकास, प्रबंधन, योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति से जुड़ी हजारों पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध था। सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. अनिल ने कहा कि डिजिटल क्रांति के बावजूद भौतिक पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है।
यह मेला केवल खरीद-फरोख्त का जरिया नहीं बल्कि संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का मंच है। वहीं शारीरिक शिक्षा विभाग के डॉ. नवीन लाडवाल ने खेल विज्ञान और फिटनेस संबंधी पुस्तकों की उपलब्धता को खिलाड़ियों के लिए वरदान बताया। शिक्षा विभाग की डॉ. रितु और समाजशास्त्र विभाग की डॉ. पूनम ने कहा कि समाज और शिक्षण विधियों को समझने के लिए नवीन शोधपरक पुस्तकों का अध्ययन अनिवार्य है।
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संगीत विभाग की डॉ. कविता व डॉ. कृष्ण ने कहा कि संगीत और दर्शन की पुस्तकों ने विद्यार्थियों में रचनात्मकता का संचार किया है। प्रबंधन विभाग की डॉ. सुधा यादव ने नेतृत्व और उद्यमिता पर आधारित साहित्य को भविष्य के प्रबंधकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया। विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने मेले के प्रति अपना फीडबैक साझा किया। योग विभाग के छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली प्रबंधन की पुस्तकों में रुचि दिखाई जबकि प्रबंधन के छात्रों ने स्टार्टअप और मार्केटिंग की नई तकनीक सीखने के लिए पुस्तकें खरीदीं।
शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों ने खेल मनोविज्ञान और पोषण से जुड़ी पुस्तकों को अपनी प्राथमिकता बताया। विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस मेले के समापन पर सभी विभागाध्यक्षों और विद्यार्थियों ने मांग की कि ऐसे आयोजन हर वर्ष नियमित रूप से होने चाहिए ताकि विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन का वातावरण और अधिक समृद्ध हो सके।
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