फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहर की हर कॉलोनी में मिल रहा डेंगू का लार्वा, फॉगिंग की पूरी व्यवस्था तक नहीं

विज्ञापन
शहर की कॉलोनियों में फॉगिंग करती नगर परिषद की टीम। संवाद - फोटो : Jind
विज्ञापन
जींद। जिले में डेंगू इस कदर बढ़ता जा रहा है कि शहर की हर कॉलोनी और प्रत्येक गांव में डेंगू का लार्वा मिल रहा है। पूरे शहर व गांवों को फॉगिंग कराने की जरूरत है, लेकिन प्रशासन के पास इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है। जिले में केवल 66 ग्राम पंचायतों के पास फॉगिंग मशीन हैं, लेकिन वह भी अधिकतर खराब पड़ी हैं।
विज्ञापन

इसके अलावा नगर परिषद के पास शहर में फॉगिंग के लिए केवल एक ही मशीन है। इतनी व्यवस्था से काम नहीं चल रहा। इस कारण जिले में डेंगू के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जितने लोग अपनी जांच नागरिक अस्पताल में करवा रहे हैं, उनमें से 30 प्रतिशत की रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आ रही है। इससे साफ है कि डेंगू अब हर गली व मोहल्ले में पहुंच चुका है।
दो वर्ष पहले ग्राम पंचायतों ने गांव में फॉगिंग के लिए मशीनें खरीदी थी। दो वर्ष तक इन मशीनों का कोई प्रयोग नहीं हुआ, क्योंकि डेंगू के कोई खास मामले सामने नहीं आए। अब दो वर्ष बाद इन मशीनों को चलाया जा रहा है तो यह काम नहीं कर रही। वहीं शहर में फॉगिंग के लिए नगर परिषद के पास केवल एक ही मशीन है। यह भी जहां पर डेंगू के मरीज मिलते हैं, वहां पर फॉगिंग करती है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के पास भी फॉगिंग के लिए केवल एक ही मशीन है। यह मशीन घरों के अंदर फॉगिंग करती है। इस मशीन का प्रयोग भी उन्हीं घरों में किया जाता है, जिस घर में डेंगू पॉजिटिव केस मिलता है। इसके अलावा उन स्थानों पर फॉगिंग की कोई व्यवस्था नहीं है, जहां पर डेंगू के मरीज अभी तक सामने नहीं आए हैं। यदि जांच का दायरा बढ़ाया जाए तो जिले में डेंगू के बहुत ज्यादा मरीज मिल सकते हैं। शनिवार को केवल 39 लोगों की जांच की गई थी, जिनमें से 12 पॉजिटिव मिले थे। इससे साफ है कि 30 प्रतिशत से ज्यादा लोग डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। वैसे भी नागरिक अस्पताल में प्रति जांच नहीं हो पाती है। यदि प्रतिदिन अस्पताल में जांच हो जाए तो डेंगू के मरीज काफी सामने आ सकते हैं।
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग को मिल रहा डेंगू का लार्वा
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं। इसके अलावा यह टीमें बुखार पीड़ितों के रक्त के नमूने भी ले रही हैं। अब भी एक भी ऐसी कॉलोनी नहीं मिली है, जहां पर डेंगू का लार्वा नहीं मिला हो। स्वास्थ्य विभाग की टीमें डेंगू के लार्वा को तो खत्म कर देती हैं, लेकिन इसके बावजूद डेंगू के मामले कम होते नजर नहीं आ रहे।
डिप्टी सिविल सर्जन, मलेरिया डॉ. तीर्थ बागड़ी ने बताया कि जो लोग अपने रक्त की जांच करवाने आते हैं, उनकी जांच की जाती है। डेंगू की जांच के लिए रक्त के नमूने को 24 घंटे रखना पड़ता है, जिस कारण जांच की गति धीमी है। कई कॉलोनियों में डेंगू का लार्वा मिला है, जिसे नष्ट करवाया जाता है। लोगों को खुद भी सावधानी बरतनी होगी। बुखार पीड़ित लोगों को अस्पताल में आकर अपनी जांच करवानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें