फोटो नंबर- 06नारनौल स्थित नागरिक अस्पताल।
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नारनौल। कोख में बेटियों के कत्ल के लिए बदनाम प्रदेश के जिलों की तस्वीर अब बदलने लगी है। इस साल जनवरी से लेकर अक्तूबर तक 17 जिलों में बेटियों की जन्मदर 900 के पार पहुंच गई है। प्रदेश में फतेहाबाद का लिंगानुपात सबसे बेहतर है। यहां अक्तूबर में 1000 बेटों पर 963 बेटियों ने जन्म लिया है।
वहीं, पंचकूला में रिकॉर्ड 45 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। महेंद्रगढ़ भी 8 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 900 के ऊपर पहुंच गया है।
इस साल जनवरी से अक्तूबर का लिंगानुपात बढ़कर 913 पहुंच गया है। नवंबर और दिसंबर में जिन जिलों में लिंगानुपात कम है वहां भी बेहतर होने की उम्मीद है।
सबसे खराब लिंगानुपात चरखी दादरी का रिकॉर्ड हुआ है। यहां 1000 बेटों पर महज 856 बेटियां पैदा हुईं। 2024 में जनवरी से अक्तूबर तक चरखी दादरी का 873 लिंगानुपात था जो इस बार घटकर और नीचे चला गया है।
इन जिलों में देखने को मिली गिरावट : प्रदेश में अक्तूबर माह में चरखी दादरी, झज्जर, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर में बेटियों की जन्मदर में गिरावट देखने को मिली है।
5 जिलों में 900 से भी कम बेटियाें की जन्मदर : जनवरी से अक्तूबर तक रोहतक में 899, सोनीपत में 888, गुरुग्राम में 881, रेवाड़ी में 881 और चरखी दादरी में 856 लिंगानुपात रहा है। इसमें सोनीपत ऐसा जिला हैं जहां बीते वर्ष 900 लिंगानुपात रहा था।