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Jind News: डल्लेवाल को बात करने में परेशानी, उनके पास किसी को आने से किया मना

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08जेएनडी41: डल्लेवाल से मिलते हुए समाजवादी पार्टी के मुजफ्फर नगर से सांसद एवं नेशनल जनरल सेक्रे - फोटो : मृतक किसान राजबहादुर सिंह।
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नरवाना। खनौरी बॉर्डर पर 44 दिन से आमरण अनशन कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को अब बात करने में भी परेशानी आ रही है। उन्होंने बात करने में असमर्थता जाहिर की है। इसके अलावा बीपी की समस्या भी बनी हुई है। बीपी को सामान्य रखने के लिए पैरों को शरीर के अन्य हिस्सों से ऊंचाई पर रखा जा रहा है।
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बुधवार को चिकित्सकों ने डल्लेवाल के स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए कहा कि उनके पैरों को यदि शरीर के अन्य हिस्सों के समतल करते हैं तो उनका ब्लड प्रेशर काफी कम हो जाता है। बीपी थोड़ा स्थिर करने के लिए उनके पैरों को ऊंचाई पर रखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जगजीत सिंह डल्लेवाल ने विशेष निवेदन किया कि बात करने में उनको परेशानी आती है, इसलिए किसी भी व्यक्ति को उनकी ट्राॅली में नहीं आने दिया जाए। उन्होंने कहा कि वह सभी व्यक्तियों की भावना का सम्मान करते हैं, लेकिन मेडिकल मजबूरी की वजह से वह बात करने में असमर्थ हैं। किसान नेताओं ने कहा कि देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली के किसानों से बैठक कर कह रहे हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ उनको नहीं मिल रहा है। इसलिए वह दुखी हैं, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें 13 फरवरी 2024 से सड़कों पर बैठे किसानों और 26 नवंबर 2024 से आमरण अनशन कर रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल का संघर्ष व त्याग नहीं दिख रहा है। किसान नेताओं ने कहा कि एग्रीकल्चर सेन्सस 2016 के अनुसार दिल्ली में 21000 किसान थे। इनकी संख्या पिछले 8 साल में घट चुकी है। डल्लेवाल की बिगड़ती हालत के मद्देनजर केंद्र सरकार को गंभीर होकर किसानों की समस्याओं का हल करना चाहिए। बुधवार को समाजवादी पार्टी के मुजफ्फर नगर से सांसद एवं नेशनल जनरल सेक्रेटरी हरेंद्र मलिक अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ जगजीत सिंह डल्लेवाल का हालचाल जानने के लिए आए और उन्होंने अखिलेश यादव का संदेश जगजीत सिंह डल्लेवाल तक पहुंचाया।

बाक्स

डल्लेवाल की तबियत ज्यादा खराब होने के कारण अखिलेश यादव ने किसान नेता काका सिंह कोटड़ा से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि वह सभी राजनीतिक पार्टियों से बात करेंगे। प्रयास करेंगे कि सभी राजनीतिक पार्टियां आपसी मतभेद भुलाकर एमएसपी गारंटी कानून में मुद्दे पर एक जुट हों, ताकि किसानों की आत्महत्या रोकी जा सके।
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