भले ही स्वास्थ्य विभाग लोगों के बेहतर चिकित्सा सेवा देने का दावा करता है, लेकिन हर बार विभाग के दावों की पोल खुल ही जाती हैं। ऐसा ही मामला जींद के नागरिक अस्पताल में भी सामने आया है। यहां चलती एंबुलेंस में एक प्रसूता ने बच्चे को जन्म दे दिया। महिला के परिजनों ने इस पर कालवा सीएचसी के स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि जच्चा और बच्चा दोनों सही सलामत हैं।
गांगोली गांव में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मूल रूप से राजस्थान निवासी मनीष की पत्नी को परिजन प्रसव पीड़ा के चलते दोपहर बाद करीब ढाई बजे सीएचसी कालवा ले गए। यहां मौजूद स्टाफ ने उसकी देखभाल नहीं की। मनीष की पत्नी विद्या ने बताया कि उसके प्रसव का समय नजदीक था ऐसे में गांव की बुजुर्ग महिलाओं की सलाह पर उसे कालवा गांव सीएचसी सेंटर लाया गया। सीएचसी में तैनात स्टाफ ने खून टेस्ट कर उसे नागरिक अस्पताल जींद रेफर कर दिया। उसे बताया गया कि उच्च रक्तचाप के कारण सीएचसी पर डिलवरी नहीं करवाई जा सकती। यहां गांव की महिला ने स्टाफ को बताया कि इस हालत में जींद तक प्रसूता को नहीं पहुंचाया जा सकता, लेकिन स्टाफ ने एक नहीं सुनी और गर्भवती को जींद रेफर कर दिया।
एंबुलेंस चालक ने बुलाया निजी डॉक्टर
महिला की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एंबुलेंस चालक ने रास्ते में फोन कर एक निजी चिकित्सक को बुलाया। इस चिकित्सक ने हालांकि महिला की संभाल की, लेकिन नागरिक अस्पताल के नजदीक पहुंचते ही चलती एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
चलती एंबुलेंस में बच्चे को जन्म देने के मामले में परिजनों कालवा सीएचसी में मौजूद नर्स पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। महिला के पति मनीष ने बताया कि सीएचसी स्टाफ ने जानबूझकर डिलीवरी करने से मना कर दिया। इसके बाद एक एंबुलेंस में दो गर्भवती महिलाओं को जींद के नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया।
पहले भी आ चुके इस तरह के मामले
इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। पिछले कुछ ही समय पहले एक महिला ने नागरिक अस्पताल के बाहर गेट पर डिलवरी का मामला सामने आया था।
बच्चे और महिला का प्राथमिक उपचार जारी
एंबुलेंस में डिलवरी में डिलवरी होने का मामला सामने आया है। बच्चे और महिला को प्राथमिक उपचार जारी है। इस मामले की जांच करवाई जाएगी। फिलहाल बच्चा और महिला की हालात ठीक है। -डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन।