जींद। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने को-ऑपरेटिव सोसायटी के सब इंस्पेक्टर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी प्लाट दूसरे के नाम पर ट्रांसफर करने की एवज में रिश्वत ले रहा था। वह 5 हजार और ढ़ाई रुपये पहले ले चुका था और 50 हजार रुपये के साथ लघु सचिवालय के पीछे पार्क में राशि के साथ पकड़ा गया है। स्टेट ब्यूरो विजिलेंस की टीम ने आरोपी को नामजद कर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के पास नारनौंद निवासी को-आपरेटिव सोसायटी से सेवानिवृत्त एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसके शहर की नेताजी काॅलोनी में दो प्लाट हैं। उन प्लाटों को दूसरे के नाम पर ट्रांसफर करवा रहा है, लेकिन सहकारी समिति के रजिस्ट्रार खरकगागर निवासी प्रदीप उससे साढ़े 50 हजार रुपये मांग रहा है। वह उसे पांच हजार और ढ़ाई रुपये दे चुका है। इस पर इंस्पेक्टर मनीष के नेतृत्व में राजकीय कॉलेज के एसोसिएट प्रो. राजेश बूरा को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता को ड्यूटी मजिस्ट्रेट से हस्ताक्षर तथा 50 हजार रुपये पाउडर लगाकर थमा दिए। संपर्क साधने पर को-ऑपरेटिव सोसायटी के सब इंस्पेक्टर प्रदीप ने शिकायतकर्ता ओमप्रकाश को लघु सचिवालय के पीछे पार्किंग में बुला लिया। जैसे ही सब इंस्पेक्टर प्रदीप पार्क में पहुंचा और सेवानिवृत्त कर्मचारी ने प्रदीप को 50 हजार रुपये दे दिए। तभी स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने तुरंत प्रदीप को काबू कर उससे रिश्वत के रूप में ली गई 50 हजार रुपये की राशि बरामद कर ली।
जांच अधिकारी इंस्पेक्टर मनीष ने बताया कि सब इंस्पेक्टर प्रदीप प्लाट ट्रांसफर करने की एवज में साढ़े 57 हजार रुपये मांग रहा था, जिसकी शिकायत उनके पास आई थी। विजिलेंस की टीम ने आरोपी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते काबू किया है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया है।