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हरियाणा: 13 साल बाद भी बीरेंद्र सिंह को 'साल' रहा है हार का दर्द, ओपी चौटाला से महज 621 मतों से मिली थी हार

Sat, 26 Mar 2022 12:38 AM IST
भूपेंद्र सिंह धर्मवीर निडाना, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)

सार

अपने 76वें जन्मदिन पर कार्यक्रम में कई नेता नहीं आने पर बीरेंद्र सिंह का दर्द छलका। बीरेंद्र सिंह बोले कि राजनीति में ऐसे मूल्य नहीं हों, मुख्यमंत्री विधायकों को निजी कार्यक्रम में जाने से भी रोक दें।
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मंच पर संबोधित करते चौधरी बीरेंद्र सिंह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के जींद में अपने 76वें जन्मदिन पर कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता बीरेंद्र सिंह को 13 साल पहले ओमप्रकाश चौटाला के हाथों मिली हार का दर्द आज भी साल रहा है। ट्रेजडी किंग के नाम से मशहूर चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में लोगों को उल्हाना देते हुए कह डाला कि जब मौका होता है तब उन्हें हरा दिया जाता है। इसके अलावा कार्यक्रम में कई महत्वूपर्ण नेता नहीं आने पर भी उनका दर्द छलका और कहा कि निजी कार्यक्रमों में भी विधायक मुख्यमंत्री से पूछकर जाते हैं। राजनीति में ऐसे मूल्य नहीं होने चाहिए।

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दरअसल साल 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में बीरेंद्र सिंह इनेलो के उम्मीदवार चौधरी ओमप्रकाश चौटाला से महज 621 मतों से हार गए थे। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि यूं तो क्षेत्र के लोग दोस्त होने की दुहाई देते रहते हैं लेकिन जब मौका होता है तब हरा देते हैं।

हालांकि उन्होंने कहा कि 50 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने ईमानदारी से काम किया। यही कारण है कि वे आज भी अपने कार्यक्रम के लिए लोगों को लाने के लिए गाड़ियां नहीं भेजते। यदि ईमानदारी नहीं रखी होती तो लोग कह देते कि नौकरी के लिए पैसे दिए थे अब गाड़ियों पर क्यों लगाएं। 
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पूर्व विधायक से सरकार बनती तो आज बना लें
दरसअल चौधरी बीरेंद्र सिंह के मंच पर उनके सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह, राज्यसभा सदस्य डॉ. सुशील गुप्ता, ऐलनाबाद से विधायक व इनेलो नेता अभय चौटाला को छोड़ कर सभी पूर्व मंत्री, विधायक व सांसद रहे। इस पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि पूर्व विधायकों से सरकार बनें तो आज बना लें। उन्हें राजनीतिक मूल्यों में बदलाव करना है। 

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आप के सांसद डॉ. सुशील गुप्ता से बातचीत करते मंच पर बैठे चौधरी बीरेंद्र सिंह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मंच पर पहुंचे विभिन्न पार्टियों के नेता, वर्तमान विधायक व सांसदों की खली कमी
पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के कार्यक्रम में यूं तो कई राजनीतिक दलों के नेता पहुंचे लेकिन इनमें से अधिकतर पूर्व सांसद, विधायक या मंत्री रहे। मंच नेताओं के जमावड़े के बावजूद वर्तमान सांसद व विधायकों की कमी खलती रही। कार्यक्रम के संयोजक पूर्व शिक्षा मंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा रहे तो सह संयोजक हिसार से सांसद बृजेंद्र सिंह रहे। बीरेंद्र सिंह ने विभिन्न राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर नई राजनीतिक व्यवस्थाओं की ओर इशारा किया है।

कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के हरियाणा प्रभारी सुशील गुप्ता, इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला, पूर्व मंत्री रामपाल माजरा, पूर्व मंत्री पीयूष गोयल, किसान नेता युद्धबीर सिंह, पूर्व मंत्री सुभाष बत्रा, कृष्ण मूर्ति हुड्डा, सीमा गैबीपुर, रामकिशन बैरागी सहित काफी गणमान्य जन पहुंचे।

बीरेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं से कहा, जो आप चाहते वही होगा   
हालांकि ‘आप’ नेता डॉ. सुशील गुप्ता द्वारा दिए ऑफर व अभय चौटाला द्वारा तीसरे मोर्च का नेतृत्व करने के आह्वान पर लोगों ने खूब तालियां बजाई। हालांकि बीरेंद्र सिंह ने अपनी नई राजनीतिक पारी के बारे में पत्ते नहीं खोले, लेकिन इतना जरूर कहा कि उनके कार्यकर्ता जो चाहते हैं, वही होगा। 
 
राजनीति में किस्मत का बड़ा महत्व 
कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक रामपाल माजरा ने कहा कि राजनीति में किस्मत का महत्व होता है। 1991 में राजीव गांधी की मौत होने से बीरेंद्र सिंह मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए। 2014 में रामबिलास शर्मा बड़ा चेहरा थे लेकिन गमले से और कुछ निकला। इसी प्रकार 2019 में छह महीने पहले ही उन्होंने अभय चौटाला को मुख्यमंत्री मान लिया था लेकिन परिस्थितियां बदल गई।  
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