जींद। आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि भारत के तन-मन-प्राणों में बसे हैं महावीर हनुमान। भक्ति, शक्ति, समर्पण, सेवा व त्याग की मूर्ति हैं बजरंग बली हनुमान। आज की विकट परिस्थितियों में जब मानव अपने दायित्व के प्रति विमुख हो रहा है, हनुमान जी का चरित्र सर्वाधिक प्रासांगिक व अनुकरणीय है।
आचार्य पवन शर्मा माता वैष्णवी धाम में भगवान हनुमान जन्मोत्सव पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर बाबा के भक्तों ने सुंदरकांड का सामूहिक पाठ किया व मधुर भजनों के द्वारा हनुमान जी का गुणगान किया। आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि सीता राम के अनन्य भक्त हनुमान अत्यंत शक्ति संपन्न एवं परम पराक्रमी तो हैं ही वे अत्यंत बुद्धिमान, शास्त्रों के पारंगत विद्वान, परम नीतिज्ञ व सरलता की मूर्ति भी हैं। उनके तन-मन व प्राणों में श्रीराम इस प्रकार व्याप्त हो गए हैं कि उनका श्रीराम से पृथक अस्तित्व ही नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य किसी प्रकार प्रभु की और उन्मुख हो जाए, दयामय प्रभु की और पग बढ़ा कर, उन पर समर्पित होकर अपना कल्याण सुनिश्चित कर ले, इसके लिए कृपामूर्ति हनुमान सदैव प्रयत्नशील बने रहते हैं। समाजसेवी सोमवीर पहलवान व नगर परिषद् की पर्वू चेयरपर्सन डाॅ. सुदेश देवी ने सपरिवार महावीर हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।