नागरिक अस्पताल में बंद पड़ा आयुष्मान योजना का कार्यालय। संवाद।
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जींद। प्रधानमंत्री की जरूरतमंद लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने की आयुष्मान भारत योजना में काफी लोग रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जिले में पौने तीन लाख लोगों के आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड बनने थे, जोकि अब तक केवल एक लाख 70 हजार लोगों के ही बन पाए हैं। इससे जरूरतमंद लोग इस योजना का लाभ लेने से वंचित रह रहे हैं। इसमें केवल स्वास्थ्य विभाग की दोषी नहीं है। जो लोग इस योजना के पात्र हैं, वह भी अस्पताल में अपना कार्ड बनवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। पिछले चार वर्षों में इस योजना के तहत 18 हजार से अधिक पात्र लोग लाभ उठा चुके हैं।
जरूरतमंद परिवारों को निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज इस योजना के तहत दिया जाता है। वर्ष 2011 के सर्वे के अनुसार जिले में इस योजना के लिए पौने तीन लाख पात्र हैं। इन सभी के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने हैं। कार्ड बनने के बाद ही लोग इस योजना का लाभ उठा सकते हैं लेकिन आज तक केवल एक लाख 70 हजार लोगों ने ही अपने कार्ड बनवाए हैं। चार वर्षों से स्वास्थ्य विभाग लगातार योजना में शामिल लाभार्थियों के कार्ड बना रहा है। इनमें से केवल एक लाख 70 हजार से अधिक लाभार्थियों ने ही कार्ड बनवाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के 11 सरकारी और 12 निजी अस्पतालों को योजना में शामिल किया हुआ है। निजी अस्पतालों में पहुंचकर लाभार्थी कार्ड के माध्यम से पांच लाख तक का इलाज मुफ्त में करवा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने खुद के स्तर पर लाभार्थियों को कार्ड बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके चलते एक लाख 70 हजार से अधिक लाभार्थी कार्ड बनवा चुके हैं, जबकि डेढ़ लाख के करीब पात्रों की पहचान ही नहीं हो पाई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार कैंप का आयोजन कर कार्ड भी बनाए जा रहे हैं।
आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों के लगातार कार्ड बनाए जा रहे हैं। लोगों को आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जरूरतमंद व्यक्ति कार्ड बनवाकर सरकार द्वारा दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले सकता है। जिन लोगों के कार्ड नहीं बने हैं, उन्हें चाहिए कि वह कार्ड बनवा लें।
-डॉ. नवनीत सिंह, नोडल अधिकारी आयुष्मान कार्ड योजना।