जींद। अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिलास्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक सोमवार को लघु सचिवालय सभागार में डीसी मोहम्मद इमरान रजा की अध्यक्षता में हुई।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का अत्याचार या दुर्व्यवहार होता है तो पीड़ित परिवार को तुरंत प्रभाव से आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। डीसी ने जिला कल्याण विभाग की जिलास्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में आर्थिक सहायता के जो मामले रखे थे उन पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन मामलों को तुरंत प्रभाव से निपटाएं। पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करें। उन्होंने जिला कल्याण अधिकारी से कहा कि अगर बजट की कोई आवश्यकता है तो तुरंत मुख्यालय से प्राप्त करें। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों की चालान प्रति तुरंत जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध करवाएं, ताकि पीड़ित को शीघ्र सहायता राशि उपलब्ध करवाई जा सके। इस स्कीम के तहत विभिन्न प्रकार के अत्याचार होने पर अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को अधिनियम के नियमों के अनुसार 85 हजार रुपये से लेकर 8 लाख 25 हजार रुपये तक की राशि प्रदान की जाती है। इसके लिए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह राशि विभिन्न प्रकार के अत्याचारों जैसे अपमानित, क्षति पहुंचाना, भूमि पर अनधिकृत कब्जा, हत्या, डकैती, दुष्कर्म व नरसंहार, ट्यूबवेल का नुकसान, चल-अचल संपत्ति का नुकसान, स्थायी-अस्थायी अपंगता आदि घटित होने पर प्रदान की जाती है। इस अवसर जिला कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार, राजकीय महिला कॉलेज प्राचार्य जयनारायण गहलोत, प्राध्यापक सतीश कुमार, उप अधीक्षक आजाद सिंह मौजूद रहे। संवाद