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जींद: बच्ची के उपचार के लिए बिना स्टॉपेज के 20 मिनट रुकी अमृतसर-हजूर नांदेड़ एक्सप्रेस, पैर में लग गया था कांच

Tue, 03 May 2022 08:02 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)

सार

चार माह की बच्ची के पैर में कांच लग गया था और खून नहीं रुक रहा था। रेलवे अधिकारियों ने चिकित्सकों को भेजकर बच्ची का इलाज करवाया गया।
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उपचार के बाद अपनी मां की गोद में सो रही बच्ची। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अमृतसर से हजूर साहिब नांदेड़ जाने वाली 12422 एक्सप्रेस ट्रेन को सोमवार रात जींद जंक्शन पर बिना स्टॉपेज के एक बच्ची के इलाज के लिए रोकना पड़ा। रेलवे अधिकारियों ने चिकित्सकों को भेजकर बच्ची का इलाज करवाया और इसके बाद ही ट्रेन को आगे रवाना किया गया। बच्ची के पैर में कांच लग गया था, जिससे उसका खून नहीं रुक रहा था।

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लुधियान से झांसी जाने के लिए अमृतसर-हजूर साहिब नांदेड़ एक्सप्रेस में एक दंपती सवार हुआ। यह ट्रेन लुधियाना से धुरी, संगरूर, जाखल, जींद, रोहतक होते हुए हजूर साहिब नांदेड़ जा रही थी। यह ट्रेन दोपहर बाद दो बजे अमृतसर से चली थी। रात को अचानक चार माह की बच्ची के पैर में कांच लग गया। उसके पिता रघुबीर ने बच्ची के पैर से कांच निकाल दिया, लेकिन खून नहीं रुक रहा था।
 

रघुबीर सिंह ने इसकी सूचना टीटी कर्ण सिंह को दी। टीटी कर्ण सिंह ने इस बारे में सीएमआई पंकज राजपूत को बताया। पंकज राजपूत ने जींद स्टेशन अधीक्षक जयप्रकाश को मामले की सूचना दी। शेड्यूल के हिसाब से इस ट्रेन का जींद जंक्शन पर कोई ठहराव नहीं था, लेकिन बच्ची के इलाज के लिए इस ट्रेन को रात करीब 02:20 बजे जींद जंक्शन पर रोका गया। रेलवे को डॉक्टर अनुराग यादव, सहायक महेंद्र वर्मा व अश्विनी ने मौके पर पहुंचकर बच्ची का इलाज किया और ट्रेन को 20 मिनट के बाद 02:40 बजे रवाना किया गया। 

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पंजाब मेल के टीटी का भी किया उपचार
सोमवार रात को ही पंजाब मेल में कार्यरत टीटी तिलकराज का बीपी ज्यादा हो गया था। उसने इसकी सूचना जींद जंक्शन पर अधिकारियों को दी। सूचना के बाद डॉ. अनुराग यादव व उनकी टीम ने टीटी तिलकराज का इलाज किया।
 

इमरजेंसी में बच्ची का उपचार करना जरूरी था। उसके पैर से खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था। ट्रेन को रोकना पड़ा। इसके बाद रेलवे चिकित्सकों ने बच्ची का उपचार करके ट्रेन को रवाना किया। वहीं एक टीटी तिलकराज का भी उपचार किया गया।  -जयप्रकाश, रेलवे स्टेशन अधीक्षक।

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