सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने बुधवार को नेशनल मुद्रीकरण पाइपलाइन नीति के तहत सार्वजनिक संपत्ति को बेचने व किसानों पर करनाल में हुए लाठीचार्ज के विरोध में डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान रामफल दलाल व सचिव सतीश शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में आमजन की मजबूरियों का फायदा उठाकर पहले जनता के खून-पसीने से खड़े किए गए सार्वजनिक क्षेत्र जैसे बैंक, बीमा, तेल, रक्षा उत्पादन की सेवाओं का निजीकरण किया गया और अब एनएमपी के अंतर्गत 26700 किलोमीटर सड़कें, 400 रेलवे स्टेशन व 150 ट्रेन, 42300 किलोमीटर लंबी पावर ट्रांसमिशन लाइन, 8000 किलोमीटर नेशनल गैस पाइपलाइन, पावर जनरेशन 5000 मेगावाट, 4000 किलोमीटर ऑयल पाइपलाइन, एमटीएनएल व बीएसएनएल के टावर, 160 कोयला प्रोजेक्ट, हवाई अड्डे, बंदरगाह, स्टेडियम, वेयर हाउस के गोदाम व अर्बन रियल एस्टेट की बेशकीमती संपत्तियों को देसी व विदेशी पूंजीपतियों को कौड़ियों के भाव सौंपकर छह लाख करोड़ रुपया जुटाने का एलान किया है।
ऑल हरियाणा पावर वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी व राज्य ऑडिटर डॉ. राजबीर बेरवाल ने कहा कि सरकार के इस जनविरोधी फैसले से जनता को मिलने वाली सार्वजनिक सुविधाएं जहां महंगी होती चली जाएंगी, वहीं रोजगार के अवसर सिकुड़ने से बेरोजगारी बढ़ेगी। किसान सभा के राज्य प्रधान फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि सरकार तानाशाही पर उतारू है और जगह-जगह किसानों पर अत्याचार कर रही है। करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज ने तो अंग्रेजी हुकूमत की याद दिला दी। देश का किसान किसी भी सूरत में कृषि कानूनों को वापस करवाए बिना आंदोलन खत्म नहीं करेगा। कर्मचारी, मजदूर व किसान अब एक हो चुके हैं और तानाशाह सरकार को आइना दिखाकर ही दम लेंगे। इस अवसर पर ईश्वर सच्चाखेड़ा, प्रदीप शर्मा, विक्रम सिंह, इंद्र सिंह श्योकंद, सुभाष कंडेला, धर्मबीर भंभेवा, सुरेश पुनिया, सोमपाल, रणधीर, जगदीश शर्मा, ईश्वर ठाकुर, सुशील, संदीप पूनिया, राजेश व भूप सिंह वर्मा रहे।