24जेएनडी12: किसानों को प्रगतिशील महिला किसान सुमित्रा रानी प्रशिक्षण देते हुए। स्रोत : किसान
जींद। कृषि में बढ़ती लागत और रासायनिक दवाओं के दुष्प्रभावों से बचने के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए। इससे न केवल उत्पादन लागत कम होती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
यह बात हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अहिरका गांव स्थित एस एंड एस ऑर्गेनिक फार्म के भ्रमण के दौरान प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ डॉ. सुभाष चंद्र ने कही।
हमेटी के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में सीआरपी किसानों ने प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों और उनके सफल परिणामों का अवलोकन किया। किसानों को बहुस्तरीय एवं बहुफसलीय खेती के उत्कृष्ट मॉडल दिखाए गए, जिन्हें देखकर उन्होंने अपने खेतों में भी इन तकनीकों को अपनाने की इच्छा जताई।
डॉ. सुभाष चंद्र ने किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, तकनीकों और इसके दीर्घकालिक लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हरको फेडरेशन के एसीईओ ऋषिपाल श्योकंद ने किसानों को सीएमपैक्स योजना की जानकारी देते हुए इसके लाभ बताए।
वहीं कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. ईश्वर दत्त ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में गुण नियंत्रण निरीक्षक डॉ. नरेंद्र कुमार तथा प्रगतिशील महिला किसान सुमित्रा रानी भी मौजूद रहीं। भ्रमण कार्यक्रम में अहिरका गांव के करीब 40 किसानों ने भाग लिया।