रोहतक। भूख सिर्फ पेट की नहीं, आत्मा की भी होती है। यह वाक्य मॉडल टाउन निवासी डॉ. देवीना बधवार के जीवन की पहचान बन चुका है। पिछले 9 वर्षों से वह रोहतक के जरूरतमंद बच्चों के साथ सिर्फ भोजन ही नहीं, अपनापन और स्नेह भी बांट रही हैं।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार रहे उनके पिता मनोज बधवार छुट्टियों में बेटी को साथ लेकर खाना बनाते और जरूरतमंद बच्चों को खिलाने जाते थे। वही सेवा संस्कार देवीना के जीवन में गहराई तक उतर गया। 2018 में पिता के अचानक निधन के बाद उन्होंने आंसू पोछकर तय किया कि पापा की सेवा अब उनकी जिम्मेदारी है।
तब से आज तक यह सिलसिला नहीं टूटा। अब यह सिर्फ सेवा नहीं, जुड़ाव बन चुका है। देवीना कहती हैं कि अब हर त्योहार इन्हीं बच्चों के साथ मनता है। दीपावली हो, होली हो या नया साल...हर सप्ताह में से एक दिन हर बार बच्चों की पसंद का खाना बनाकर उन्हें वही खुशी देने की कोशिश करती हूं जो हर बच्चे को मिलनी चाहिए।
वह बताती हैं कि नया साल को शहर से बाहर रहना है इसलिए इस बार क्रिसमस और नया साल का उत्सव पहले ही बच्चों के साथ मना लिया गया। खुशियों से भरे चेहरे उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार हैं। केवल खाना ही नहीं वह बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करती हैं। वह कहती हैं कि इन बच्चों को स्कूल से कॉलेज तक पहुंचते देखना मेरे लिए पिता की मुस्कान जैसा है।
उन्होंने कई जरूरतमंद बच्चों को स्वयं इंग्लिश का ट्यूशन दिया और उनका मनोबल बढ़ाया। स्कूल से कॉलेज तक की राह दिखाई। आज यह मेहनत परिणाम दे रही है। उनकी गाइडेंस में पढ़े तीन बच्चे आज गर्व से आगे बढ़ रहे हैं। एक छात्रा एमडीयू में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही है, एक लड़की हिंदू कॉलेज से बीकॉम कर रही है और एक बेटी वैश्य कॉलेज से लॉ की पढ़ाई कर रही है। संवाद